आरएसएस का युवाओं और महिलाओं पर ध्यान बढ़ाने का फैसला


सुनवाई के दौरान कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड चांद कुरैशी, एडवोकेट आरिफ अली, एडवोकेट मुजाहिद अहमद व अन्य मौजूद थे। इससे पहले की सुनवाइयों में उसी बेंच ने फांसी की सजा पाने वाले दो आरोपियों मोहम्मद तनवीर और अहमद बावा की अपीलों पर सुनवाई करते हुए फांसी की सजाओं पर रोक लगा दी थी। आजीवन कारावास की सजा पाने वाले आरोपी की यह पहली अपील है जिसे कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अभियोजन को नोटिस जारी किया।
गुजरात इंडियन मुजाहिदीन केस में गुजरात हाई कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा पाने वाले एक आरोपी की अपील पर आज सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच के सामने सुनवाई हुई, जिसके दौरान कोर्ट ने आरोपी की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया।
जारी रिलीज के अनुसार जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच, जिसका हिस्सा संधीप महता और जस्टिस अप्रेष कुमार हैं, ने मुंबई से संबंध रखने वाले मोहम्मद सादिक इस्लाम शेख की अपील पर सुनवाई की। आरोपी सादिक की पैरवी वरिष्ठ एडवोकेट गुरु अग्रवाल ने की। जमातुल उलमा महाराष्ट्र (अर्शद मदनी) कानूनी सहायता समिति की ओर से आरोपी की पैरवी करते हुए वरिष्ठ एडवोकेट गुरु अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि सेशन कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट ने आरोपी को एक दूसरे आरोपी के बयान के आधार पर आजीवन कारावास की सजा दी है, जबकि जिस आरोपी ने आवेदक सादिक इस्लाम शेख के खिलाफ गवाही दी थी, कोर्ट ने उसे केस से बरी कर दिया है। वरिष्ठ एडवोकेट गुरु अग्रवाल ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी से पुलिस हिरासत में लिए गए बयान की कोई कानूनी स्थिति नहीं है, फिर भी हाई कोर्ट ने आरोपी की आजीवन कारावास की सजा को बनाए रखा है।
वरिष्ठ एडवोकेट गुरु अग्रवाल ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी 5/ नवंबर 2008/ से जेल की सलाखों के पीछे बंद है, साथ ही आरोपी की मौजूदगी में तैयार किए गए पंचनामे में किस जगह का पंचनामा किया गया, इसका उल्लेख नहीं है। वरिष्ठ एडवोकेट ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी को अत्यंत कमजोर प्रमाणों और संकेतों के आधार पर आजीवन कारावास की सजा मिली है, जिसकी समीक्षा की आवश्यकता है। वरिष्ठ एडवोकेट गुरु अग्रवाल के तर्कों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने नोटिस जारी किया और फांसी की सजा पाने वाले आरोपियों की अपीलों के साथ इसकी जोड़ने का आदेश जारी किया। आज सुनवाई के दौरान कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड चांद कुरैशी, एडवोकेट आरिफ अली, एडवोकेट मुजाहिद अहमद व अन्य मौजूद थे। इससे पहले की सुनवाइयों में उसी बेंच ने फांसी की सजा पाने वाले दो आरोपियों मोहम्मद तनवीर और अहमद बावा की अपीलों पर सुनवाई करते हुए फांसी की सजाओं पर रोक लगा दी थी। आजीवन कारावास की सजा पाने वाले आरोपी की यह पहली अपील है जिसे कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अभियोजन को नोटिस जारी किया।
यह ध्यान रखना चाहिए कि गुजरात हाई कोर्ट ने 38/ आरोपियों की फांसी और 11/ आरोपियों की आजीवन कारावास की सजाओं को बनाए रखा था। निचली अदालत ने अहमदाबाद और सूरत में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के आरोपों साबित होने पर आरोपियों को सजा सुनाई थी। गुजरात हाई कोर्ट के फैसले आने के बाद आरोपियों के परिवार ने जमातुल उलमा महाराष्ट्र के प्रमुख मौलाना हलीम अल्लाह क़ासमी से मुलाकात कर कानूनी सहायता मांगी थी। 49/ में से 35/ आरोपियों ने जमातुल उलमा महाराष्ट्र से कानूनी सहायता मांगी। भारत के सुप्रीम कोर्ट में एक के बाद एक आरोपियों की अपीलों दायर करने की प्रक्रिया जारी है।
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