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राष्ट्रीय

कृषि भूमि पर पुरानी मस्जिद पर खतरे के बादल

Awaze Bihar3 मिनट पढ़ें

दिल्ली में केंद्रीय विस्टा पुनर्विकास परियोजना के कारण कृषि भवन मस्जिद के संबंध में अब स्थिति बदलने की संभावना दिख रही है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 19 जनवरी 2026 को सीपीडब्ल्यूडी द्वारा कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्निर्माण के लिए जारी किए गए टेंडर दस्तावेजों में मस्जिद को हटाई जाने वाली इमारतों की सूची में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। लेकिन टेंडर के साथ संलग्न नक्शे में मस्जिद को प्रस्तावित भवन के नए नक्शे में उसके मूल स्थान पर नहीं दिखाया गया है। यह स्पष्ट है कि इस टेंडर में बोली जमा करने की अंतिम तिथि 13 फरवरी है। सीसीएस 4 और 5 परियोजनाओं का अनुमान 3,006.07 करोड़ रुपये है और इसे 24 महीनों में पूरा किया जाना है। यह स्पष्ट है कि कृषि भवन परिसर में स्थित प्राचीन मस्जिद में सरकारी कर्मचारी नमाज अदा करते हैं।

दिल्ली में धार्मिक स्थलों को ध्वस्त करने का सिलसिला जारी है। कई धार्मिक स्थल जैसे मस्जिद, दरगाह और अन्य धार्मिक इमारतें ध्वस्त की जा चुकी हैं। अब कृषि भवन परिसर में स्थित प्राचीन मस्जिद सुर्खियों में है। जिस पर खतरों के बादल मंडरा रहे हैं। इस मस्जिद के संबंध में कुछ विवरण एकत्र करने का प्रयास किया गया है।

कृषि भवन परिसर में स्थित प्राचीन मस्जिद 1970 के दिल्ली प्रशासन गजट में प्रकाशित वक्फ संपत्ति की सूची में शामिल है। गजट की तिथि 16 अप्रैल 1970 है। गजट के पृष्ठ संख्या 308 पर संख्या 20 पर 'कृषि भवन मस्जिद' का उल्लेख है। हालांकि कृषि भवन मस्जिद पुरातत्व में शामिल नहीं है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की वकील फरहत जहां रहमानी एडवोकेट ने यूएनआई के प्रतिनिधि से 'कृषि भवन मस्जिद' के संबंध में विस्तार से बातचीत करते हुए बताया कि 'मस्जिद कृषि भवन के संबंध में किसी भी प्रकार का कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने पूर्व परिप्रेक्ष्य में बताया कि मैंने 2021 में दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिसमें कुल छह मस्जिदें शामिल थीं। जिसके बाद 22 जुलाई 2024 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया। जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इन मस्जिदों को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है, जस्टिस प्रुषेंद्र कुमार ने आदेश में कहा था कि अगर 'सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना' से कोई खतरा महसूस हो तो तत्काल उच्च न्यायालय पहुंचें।

एडवोकेट फरहत जहां ने आगे बताया कि 'इन छह मस्जिदों में 'मस्जिद जज्बात गंज, इंडिया गेट, 'जामा मस्जिद नई दिल्ली, पास पार्लियामेंट हाउस, मस्जिद सुनहरी बाग रोड, उद्योग भवन, मस्जिद कृषि भवन परिसर, रफी मार्ग, मस्जिद वाइस प्रेसीडेंट हाउस शामिल हैं। जबकि मزار सुनहरी बाग, मोतीलाल नेहरू मार्ग, को 'सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना' के तहत 2023 में ही ध्वस्त कर दिया गया था। एडवोकेट फरहत जहां ने दिल्ली वक्फ बोर्ड कमिटी का हवाला देते हुए कहा कि 'वर्तमान में मेरे हाथ बंधे हुए हैं, क्योंकि 26 अगस्त 2023 से कोई बोर्ड औपचारिक काम नहीं कर रहा है। क्योंकि पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अजीमुल हक 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके बाद सीईओ की नियुक्ति नहीं की गई है। इसलिए वक्फ बोर्ड बिना किसी मुखिया के काम कर रहा है। जिसके कारण महत्वपूर्ण निर्णय लेने में कठिनाई आ रही है। क्योंकि आगे की कार्रवाई करने के लिए मुझे दिल्ली वक्फ बोर्ड से अनुमति पत्र की आवश्यकता होगी।

एडवोकेट फरहत जहां ने कृषि भवन परिसर में स्थित प्राचीन मस्जिद के संबंध में बताया कि मैं पूरी जांच और तैयारी के साथ अदालत जाऊंगी, क्योंकि हमारा मामला काफी मजबूत है, कृषि भवन मस्जिद वह पूजा स्थल है, जिसे सौ वर्ष से अधिक हो चुके हैं। यह बात भी स्पष्ट है कि 'कृषि भवन मस्जिद' कृषि भवन की सरकारी इमारत से पहले से मौजूद है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने यूएनआई के प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए कहा कि 'जब हमने याचिका दायर की थी तो केंद्र सरकार ने अदालत में कहा था कि मस्जिद को प्रभावित नहीं किया जाएगा। अब आगे की रणनीति के लिए कार्य योजना तैयार की जाएगी। देखते हैं आगे क्या हो सकता है। उक्त रिपोर्ट के निर्माण में दिल्ली वक्फ बोर्ड के अनुभाग अधिकारी अब्दुर रहमान ने भी महत्वपूर्ण विवरण बताने में मदद की।

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