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कश्मीर घाटी में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, अस्पतालों में मरीजों की वृद्धि

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सर्दियों की आमद के साथ जब वादी में तापमान लगातार नीचे जा रहा है, वायु प्रदूषण में असाधारण वृद्धि एक नए संकट का रूप ले चुकी है। शुष्क मौसम, धुएं के बढ़ते स्रोत और यातायात के असामान्य दबाव ने वायु की गुणवत्ता को इतना प्रभावित किया है कि कई क्षेत्रों में वायु धुंध से भरी और सांस लेने में कठिनाई हो रही है।
वादी के कई हिस्सों में पिछले एक सप्ताह से वायु में धुंध और मिट्टी के बारीक कणों की स्पष्ट परत देखी जा रही है, जबकि विभिन्न स्थानों पर स्थापित वायु गुणवत्ता मापने वाले स्टेशनों ने पीएम10 और पीएम 2.5 की मात्रा लगातार सुरक्षित सीमा से अधिक रिकॉर्ड की है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार पीएम10 का स्तर 136 से 243 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच जबकि पीएम 2.5 का स्तर 86 से 167 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा की अनुपस्थिति ने प्रदूषण को कम करने की प्राकृतिक प्रक्रिया को रोक दिया है। इस बीच यातायात जाम, निजी वाहनों का बढ़ता उपयोग, कोयले के भट्ठों और लकड़ी के चूल्हों से निकलने वाला धुआं, और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
डॉक्टरों के अनुसार खराब होती वायु का प्रभाव अस्पतालों के आपातकालीन और ओपीडी में तुरंत दिखाई देने लगा है। उनके अनुसार पिछले कुछ हफ्तों में खांसी, सांस फूलने, छाती में जकड़न, आंखों में जलन और गले की खराश की शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों की संख्या में भी चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण न केवल पहले से मौजूद बीमारियों को बदतर बना देता है, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों में भी सांस लेने की नई शिकायतें पैदा करता है, विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों में खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञ भी स्थिति को अत्यंत गंभीर बता रहे हैं। जीएमसी श्रीनगर के एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने बताया कि बारीक कण रक्त में मिलकर सूजन पैदा करते हैं, जिससे हार्ट अटैक, उच्च रक्तचाप, हृदय की असामान्यता और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि खराब वायु केवल फेफड़ों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह मानव शरीर के कई महत्वपूर्ण प्रणालियों को प्रभावित करती है और लगातार एक्सपोजर से घातक परिणाम सामने आ सकते हैं।
शोध ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदूषित वायु मानव मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालती है। लगातार प्रदूषण के कारण थकान, नींद की खराबी, चिड़चिड़ापन, चिंता और प्रतिरक्षा प्रणाली में कमी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में महामारी की प्रकृति की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। दूसरी ओर डॉक्टरों ने जनता से अपील की है कि वे अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सावधानी बरतें। उनके अनुसार नागरिकों को चाहिए कि वे धुंध और प्रदूषण वाले दिनों में कम से कम समय घर से बाहर बिताएं, विशेष रूप से सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण अपने चरम पर होता है। उन्होंने खिड़कियां बंद रखने, मास्क का उपयोग करने, अधिक पानी पीने, घरों में एयर प्यूरीफायर लगाने और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीजों का विशेष ध्यान रखने पर जोर दिया है। साथ ही उन्होंने सलाह दी कि कूड़ा और बायो मास जलाने से सख्ती से परहेज किया जाए।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने प्रशासन से अपील की है कि वे मौजूदा स्थिति को केवल मौसमी समस्या समझकर नजरअंदाज न करें, बल्कि एक व्यापक और दीर्घकालिक नीति तैयार करें जिसमें शहरी योजना, यातायात प्रबंधन, वृक्षारोपण, स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक उत्सर्जन के नियंत्रण जैसे कदम शामिल हों। यदि मौसम शुष्क ही रहता है और प्रभावी नीति पर तुरंत कार्रवाई नहीं की जाती है तो विशेषज्ञों के अनुसार कश्मीर घाटी को इस सर्दी के मौसम में गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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