अनंत सिंह-निरंजन तनाव, JDU की हड्डी, राष्ट्रपति का कड़ा संदेश: नीतीश कुमार की टीम बिगड़ते मामले को कैसे सुलझाएगी?
Awaz E Bihar
••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
पटना: (एबीएन) बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रही राजनीतिक कलह पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। मुकामा के जेडीयू विधायक अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के उम्मीदार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर अभियान चला रहे हैं और जन सूरज के उम्मीदार अनोज सिंह का समर्थन कर रहे हैं। हिंदुस्तान लाइव के रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले ने पार्टी प्रमुखों की चिंता बढ़ा दी है। जेडीयू के राज्य प्रमुख अमिश कुशवाहा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी के अपने उम्मीदार नीरज कुमार के खिलाफ पार्टी के विधायक अनंत सिंह का खड़ा होना सही नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पूरा मामला पार्टी की शीर्ष प्रमुखों के सामने है और जल्द ही इस पर फैसला सामने आएगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अनंत सिंह ने नीरज कुमार को हरा देने का ऐलान कर दिया है और खुले आम जन सूरज उम्मीदार अनोज सिंह के लिए वोट मांग रहे हैं।
दूसरी ओर जेडीयू ने नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदार घोषित किया है। नीतीश कुमार ने खुद नीरज कुमार को चुनावी प्रतीक सौंपा है, जबकि पार्टी के अन्य नेता भी नीरज के पक्ष में खुलकर आगे आ रहे हैं। मंत्री निशांत कुमार ने भी कार्यकर्ताओं से एनडीए के अधिकृत उम्मीदारों को सफल बनाने की अपील की और नीरज कुमार को जेडीयू का अधिकृत उम्मीदार घोषित किया।
प्रारंभ में जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को दी गई है। उनका कहना था कि दोनों नेता ललन सिंह के क्षेत्र से संबंधित हैं, इसलिए उन्हें दोनों से बात करके समस्या को हल करने के लिए अधिकृत किया गया है। लेकिन अब ललन सिंह ने खुद कहा है कि वे किसी के झगड़े में नहीं पड़ते। उनके अनुसार यदि दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार हों तो वे मध्यस्थता करने की कोशिश कर सकते हैं। इस बयान के बाद मामला और जटिल हो गया है।
अनंत सिंह का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने उनकी विरोध किया और उनके खिलाफ साजिश रची। इसी आधार पर वे वर्तमान विधान परिषद चुनाव में नीरज को हरा देने के लिए अभियान चला रहे हैं। दूसरी ओर नीरज कुमार का कहना है कि यदि अनंत सिंह के पास आरोपों के प्रमाण हैं तो वे न्यायालय का रुख करें। दोनों नेताओं के बीच बयानों की लड़ाई अब चुनावी अभियान तक पहुंच चुकी है।
अनंत सिंह के खुले विरोध और नीरज कुमार के पार्टी उम्मीदार के रूप में चुनावी अभियान ने जेडीयू के सामने एक कठिन स्थिति पैदा कर दी है। एक ओर पार्टी को अपने उम्मीदार के पक्ष में संगठनिक ताकत दिखानी है, तो दूसरी ओर अनंत सिंह के साथ मतभेद को भी संभालना है।
अब नजरें जेडीयू की शीर्ष प्रमुखों पर हैं कि क्या अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मध्यस्थता का रास्ता निकलेगा, या पार्टी प्रमुख अनंत सिंह के खिलाफ कोई संगठनिक फैसला लेंगे? हिंदुस्तान लाइव के अनुसार पार्टी के राज्य प्रमुख ने स्पष्ट कर दिया है कि मामला शीर्ष प्रमुखों के ज्ञात में है और जल्द फैसला अपेक्षित है।