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राष्ट्रीय

केंद्रीय एजेंसियों को चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है

Awaze Bihar4 मिनट पढ़ें

कोलकाता में 'आई पैक' के खिलाफ हुई रेड के बाद शुरू हुए विवादित मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। ईडी की याचिका पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दोनों पक्षों को आईना दिखाया। अदालत ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों को किसी भी पार्टी के चुनावी प्रक्रिया में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन वे अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं। साथ ही साथ केंद्रीय एजेंसियों की जांच में राज्य सरकार या पुलिस के हस्तक्षेप पर भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि एक राज्य की एजेंसी या पुलिस को इस तरह की गतिविधि को करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह कहते हुए अदालत ने ममता सरकार और बंगाल पुलिस को नोटिस जारी किया है। ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई बंगाल पुलिस की एफआईआर पर भी आगामी सुनवाई तक रोक लगा दी गई है। मामले की आगामी सुनवाई की तारीख 3 फरवरी तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस को सभी सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य उपकरणों और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के बीच तीखी बहस हुई। सॉलिसिटर जनरल ने ममता बनर्जी पर फाइलें चोरी करने का आरोप लगाया तो सिब्बल ने सवाल किया कि चुनाव से पहले ईडी 'आई पैक' क्यों गई?

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपल पंचोली की पीठ ने ईडी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह बहुत ही चौंकाने वाला मामला है। मुख्यमंत्री खुद पहुंच गईं, छापा पड़ा। वहां जांच में रुकावट डाला। राज्य पुलिस ने राजनीतिक सदस्यों के तरीके से काम किया। पीएमएलए की धारा 17 के तहत ईडी की ओर से कार्रवाई की जा रही थी। इस प्रक्रिया को जानबूझकर प्रभावित किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि यह एक चौंकाने वाला रुझान दिखाता है। जब कोई कानूनी संस्था अपने कर्तव्यों का पालन कर रही होती है, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हस्तक्षेप करती हैं, पुलिस कमिश्नर उनके साथ आते हैं और फिर विरोध करते हैं।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ईडी के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया और पीएमएलए की धारा 17 के तहत कार्रवाई की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी फाइलें जब्त कर लीं, यह चोरी है। उन्होंने एक ईडी अधिकारी का फोन भी ले लिया। इससे ऐसे कामों को बढ़ावा मिलेगा और केंद्रीय बलों का मनोबल गिरेगा। राज्य सरकार को लगता है कि वे चोरी कर सकते हैं और फिर विरोध कर सकते हैं। एक उदाहरण स्थापित किया जाना चाहिए जो अधिकारियों को स्पष्ट रूप से वहां मौजूद थे उन्हें निलंबित किया जाना चाहिए। इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि क्या हमें उन्हें निलंबित कर देना चाहिए? इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सक्षम प्राधिकरण को कार्रवाई का निर्देश दें। कृपया मामले का संज्ञान लें।

बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव की जिम्मेदारी आई पैक के पास है। पार्टी ने 2021 में आई पैक के साथ आधिकारिक समझौता किया था। हमारा मानना है कि ईडी को इसकी जानकारी है। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आई पैक के माध्यम से कराए जाते हैं या चुनाव आयोग के माध्यम से? सिब्बल ने कहा कि आई पैक के पास विभिन्न प्रकार के डेटा होते हैं। जब वे वहां गए तो उन्हें पता था कि पार्टी से संबंधित कई डेटा वहां मौजूद होंगे। चुनाव के बीच में वहां जाने की क्या जरूरत थी? कोयला घोटाले में आखिरी बयान 24 फरवरी 2024 को दर्ज किया गया था, तब से वे क्या कर रहे थे? सिब्बल ने सवाल किया कि अगर आपको जानकारी मिल गई तो हम चुनाव कैसे लड़ेंगे? ईडी को पार्टी कार्यालय के उस हिस्से में क्यों जाना चाहिए जहां सभी जानकारी मौजूद है? सिब्बल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी सामग्री जब्त करने के संबंध में आरोप भी झूठा है। यह उनके अपने पंचनामे से साबित होता है। यह केवल पूर्वाग्रह पैदा करने के लिए किया जा रहा है।

राज्य और डीजीपी की ओर से सिंघवी ने कहा कि हमें इस याचिका को स्वीकार करने पर मजबूत आपत्ति है। यह नोटिस जारी किया जा सकता है तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह हमारे स्वीकार्य आपत्ति से مشروط है। ईडी को केवल असाधारण परिस्थितियों में प्रवेश करने की अनुमति है। जहां व्यावहारिक रूप से कोई दूसरा रास्ता नहीं हो। मैं 'फोरम शॉपिंग' का भी विरोध करता हूं।

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