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राष्ट्रीय

धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का उद्घाटन किया

Awaze Bihar2 मिनट पढ़ें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला (एनडीडब्ल्यूबीएफ) 2026 का औपचारिक उद्घाटन किया।
इस अवसर पर कतर के संस्कृति मंत्री अब्दुलरहमान बिन हमद बिन जासिम बिन अल थानी, स्पेन के संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्टासुन डोमिनिक, स्पेन के संस्कृति मंत्रालय की महानिदेशक (पुस्तकें) मारिया जोसे गाल्वेज, उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष श्री मालंद साधक मराठे, एनबीटी के निदेशक श्री युवराज मलिक, कतर और स्पेन से आए विशिष्ट अतिथि और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। समारोह के दौरान श्री धर्मेंद्र प्रधान ने पुस्तक "द सागा ऑफ कुदोपाली: द अनसंग स्टोरी ऑफ 1857" का विमोचन किया, जो बंगाली, असमिया, पंजाबी, मलयालम, उर्दू और मराठी सहित विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित की गई है। इस अवसर पर कुदोपाली की सागा पर आधारित एक वीडियो भी उपस्थित लोगों को दिखाया गया।
समारोह से संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनडीडब्ल्यूबीएफ 2026, जो दुनिया का सबसे बड़ा बी2बी पुस्तक मेला है, केवल विचारों के आदान-प्रदान का संगम ही नहीं बल्कि भारत की मजबूत और जीवंत पाठक संस्कृति का एक महान उत्सव भी है। उन्होंने आगे कहा कि पुस्तक मेले का विषय "भारतीय सैन्य इतिहास: वेलर एंड विज्डम @75" और कतर और स्पेन जैसे देशों की भागीदारी ने इस सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन के महत्व को और बढ़ा दिया है।
श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पुस्तक "द सागा ऑफ कुदोपाली: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ 1857", जो सम्बलपुर की धरती पर स्वतंत्रता संग्राम के कम ज्ञात अध्यायों को उजागर करती है, को 9 भारतीय भाषाओं - बंगाली, असमिया, पंजाबी, मराठी, मलयालम और उर्दू - के अलावा एक अंतरराष्ट्रीय भाषा स्पेनिश में भी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक पहले हिंदी, अंग्रेजी और ओडिया में प्रकाशित हो चुकी थी और अब कुल 13 भाषाओं में उपलब्ध है। उन्होंने इसे वीर सुरेंद्र साई की विरासत और कुदोपाली के शहीदों की कुर्बानियों को श्रद्धांजलि देने के एक प्रशंसनीय प्रयास के रूप में वर्णित किया। उनके अनुसार यह कदम भारत की बहुभाषी परंपरा और वैश्विक संवाद को भी मजबूत बनाता है।

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