सामग्री पर जाएँ
Awaze Bihar
राष्ट्रीय

सरकार संसद का समय बर्बाद कर रही है: विपक्ष

4 मिनट में पढ़ें

लोकसभा में विपक्षी दलों के सदस्यों ने सोमवार को "निरस्त और संशोधन विधेयक 2025" को समय की बर्बादी बताते हुए कहा कि इसमें कई विधेयक इसी सरकार ने पारित किए हैं और अब उन्हें निरस्त किया जा रहा है। विपक्षी सदस्यों ने यह भी कहा कि सरकार को लोगों को समय पर न्याय की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए और इसके लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति करनी चाहिए।

कांग्रेस के वकील डीन कुरियाकोस ने "निरस्त और संशोधन विधेयक 2025" पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि उपनिवेशवादी युग के कानूनों को निरस्त करने के बहाने पूरी तरह से मनमानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें शामिल जितने भी विधेयक पारित हो रहे हैं, उनमें से कुछ पिछले साल ही पारित हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार सिर्फ संसद का समय बर्बाद कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को लोगों के लिए जल्दी न्याय की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए और न्यायिक प्रणाली में सुधार के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। न्यायाधीशों की कमी को पूरा किया जाना चाहिए।

भाजपा के मनोज तिवारी ने विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि जब कानून अस्पष्टता का जाल बन जाता है तो संशोधन आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा कि अदालतों में मामले देरी का शिकार हो रहे हैं और अगर सरकार लोगों को समय पर न्याय की आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहती है और जटिल कानूनों को समाप्त कर रही है और कई अन्य कानूनों में संशोधन कर रही है तो किसी को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस निरस्तीकरण विधेयक में चार विधेयक ऐसे हैं जिनमें संशोधन किया जा रहा है और अन्य विधेयकों को निरस्त करने का प्रस्ताव है।

समाजवादी पार्टी के लाल जी वर्मा ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि पहले जो विधेयक सदन में चर्चा के लिए आते थे, उन पर संसदीय समितियों में चर्चा होती थी, लेकिन मोदी सरकार बुलेट ट्रेन पर सवार होकर विधेयक पारित करा रही है और सभी विधेयकों को जल्दबाजी में संसद में पेश करके पारित करना चाहती है। उनमें से कई विधेयक इसी मोदी सरकार के पहले पारित किए गए थे, लेकिन अब कहा जा रहा है कि उनकी कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने इसको सरकार की ओर से विधेयक पारित कराने में जल्दबाजी बताते हुए कहा कि सरकार की नीति अनिश्चित है और वह उचित विचार-विमर्श के बाद कोई विधेयक पेश नहीं करती है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को संसदीय समिति को भेजा जाना चाहिए और उचित संशोधनों के बाद इसे संसद में लाया जाना चाहिए।

डीएमके के डॉ. कलांधी वीरास्वामी ने कहा कि सरकार के पास संसद में बहुमत है और वह इसका फायदा उठाते हुए जल्दबाजी में विधेयक पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तैयारी के साथ विधेयक संसद में लाती है और जो विधेयक सदन में लाए जा रहे हैं उन्हें समितियों को नहीं भेजा जा रहा है, इसलिए जो विधेयक इसी सरकार में पारित हुए हैं उन्हें समाप्त किया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार के पास बहुमत है और बहुमत के बल पर नियमों और विनियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है और संवैधानिक सिद्धांतों का सम्मान किए बिना मनमाने तरीके से विधेयक पारित किए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर जोर दिया कि वह जो विधेयक संसद में पेश कर रही है उस पर विपक्ष के साथ चर्चा करे और राष्ट्रीय हित में एक व्यापक और पूर्ण विधेयक पेश करे। जल्दबाजी में विधेयक पेश नहीं किए जाने चाहिए और विधेयकों के नाम हिंदी में नहीं होने चाहिए।

तेलुगु देशम पार्टी के श्री भरत मठुकुमल्ली ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार जो भी नया कानून लागू करती है या पुराने कानूनों में बदलाव करती है, उसका आधार समाज की जरूरतों और हितों में होता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य काम को आसान बनाना है और ऐसे कानूनों को हटाने की जरूरत है जो भ्रम पैदा करते हैं। इसलिए इन कानूनों को निरस्त करने के लिए विधेयक पेश करके सरकार जनहित में एक बड़ा कदम उठा रही है और सभी को इसका स्वागत करना चाहिए। सरकार का अनावश्यक कानूनों को हटाने का कदम सही कदम है।

तृणमूल कांग्रेस के क्लियन बनर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं, जिनका समाधान होना जरूरी है और इसके लिए देश को अधिक न्यायाधीशों की जरूरत है। हाई कोर्ट और जिला अदालतों में भी ऐसी ही स्थिति है, लेकिन सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है और न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को देश के भविष्य के लिए कदम उठाने चाहिए, क्योंकि न्यायिक प्रणाली से लोगों का विश्वास खत्म हो रहा है, सरकार को इस विश्वास को बहाल करने के लिए कदम उठाने चाहिए।

जनता दल (यूनाइटेड) के कुशलेंद्र कुमार ने

राष्ट्रीय की और ख़बरें

सभी देखें