आरएसएस का युवाओं और महिलाओं पर ध्यान बढ़ाने का फैसला


उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हल्द्वानी हिंसा मामले में लगभग दो साल से जेल की यातनाएं झेल रहे तीन गरीब मजदूरों की जमानत याचिका को मंजूर कर दिया है।
आज यहां जारी एक रिलीज के अनुसार अदालत ने अपर्याप्त साक्ष्य और लंबी हिरासत के आधार पर आरोपियों की शर्तों के साथ जमानत पर रिहाई का आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि आरोपियों के खिलाफ कोई सीधा साक्ष्य नहीं है। उत्तराखंड हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के जस्टिस पंकज प्रोहत और जस्टिस मनोज कुमार तिवारी ने पिछले हफ्ते एडवोकेट सी के शर्मा की बहस की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
आरोपियों जुनैद, दानिश मलिक और अयाज अहमद की जमानत याचिका पर बहस करते हुए सी के शर्मा ने अदालत को बताया कि आरोपियों का नाम एफआईआर में दर्ज नहीं है और न ही पुलिस ने आरोपी के कब्जे से किसी तरह का हथियार बरामद किया है और न ही यूएपीए कानून का आवेदन संदेहास्पद है।
यह स्पष्ट है कि हल्द्वानी हिंसा मामले में पुलिस अत्याचारों के शिकार आरोपियों को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी के निर्देश पर कानूनी सहायता प्रदान की जा रही है।
यूएपीए जैसे सख्त कानून के तहत गिरफ्तार 79 आरोपियों की जमानत अब तक मंजूर हो चुकी है। आरोपी जिया उर रहमान, अब्दुर रहमान, रईस अहमद, जीशान परवेज की जमानत याचिका सुनवाई अधीन है।
दो आरोपियों जिया उर रहमान और अब्दुर रहमान की जमानत याचिकाओं पर 12 दिसंबर को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद कानूनी सहायता समिति के प्रयास के परिणामस्वरूप पहले चरण में 50 और दूसरे चरण में 22 आरोपियों की डिफ़ॉल्ट जमानत हाई कोर्ट से मंजूर हुई थी, जिसमें छह महिलाओं की डिफ़ॉल्ट जमानतें भी शामिल हैं।
डिफ़ॉल्ट जमानतें मंजूर होने के बाद एक के बाद एक आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं, जिस पर वरिष्ठ एडवोकेट नटियाराम कृष्णन बहस करेंगे।
पिछले दिनों के दौरान सुनवाई एडवोकेट सी के शर्मा की सहायता एडवोकेट मुजाहिद अहमद, एडवोकेट नितिन तिवारी, एडवोकेट विजय पांडे, एडवोकेट मनीष पांडे, एडवोकेट आसिफ अली, एडवोकेट दानिश अली, एडवोकेट जामिर अहमद, एडवोकेट मोहम्मद अदनान और अन्य ने की, जबकि आरोपियों के परिवार के साथ मौलाना मकीम कासमी (जमीयत उलेमा-ए-हिंद जिला नैनीताल के अध्यक्ष), मौलाना मोहम्मद कासिम (जमीयत उलेमा-ए-हिंद जिला नैनीताल के नाजिम), मौलाना मोहम्मद आसिम (शहर कादर जमीयत उलेमा-ए-हिंद हल्द्वानी), मुफ्ती लुकमान, डॉ अदनान, अब्दुल हसीब और अन्य उपस्थित थे।
8 फरवरी 2024 को उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर के मुस्लिम बहुल क्षेत्र बन भूलपुरा में अशांति फैल गई थी जब कथित तौर पर निर्मित मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने के लिए पुलिस पहुंची थी।
ध्वंस अभियान से पहले पुलिस और क्षेत्र के लोगों के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद पुलिस फायरिंग में पांच मुस्लिम युवकों की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद बन भूलपुरा पुलिस ने 101 मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं के खिलाफ तीन मामले दर्ज किए थे और उन पर सख्त कानून यूएपीए का आवेदन भी किया था।







