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भारत को विकसित देश बनाने में युवा अधिकारियों की ऊर्जा और आधुनिक सोच का महत्व: राधा कृष्णन

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उपराष्ट्रपति श्री सी पी राधाकृष्णन ने 2023 और 2024 बैच के भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) के अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षा लेखा विभाग की 275 वर्ष से अधिक की समृद्ध विरासत है, जो इसे भारत सरकार के सबसे पुराने विभागों में से एक बनाती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे देश 2047 तक विकसित भारत बनाने के बहु-आयामी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, सरकारी कर्मचारी इस दृष्टि को वास्तविकता में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अमृत काल के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई स्पष्ट अपील को याद किया और इस बात पर जोर दिया कि विकास को समग्र विकास और अंतिम मील तक वितरण पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवा अधिकारियों की युवा ऊर्जा और नवाचारी सोच राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण होगी और उन पर जोर दिया कि वे 'सेवा भावना और कर्तव्य बोध' को अपने मार्गदर्शक मंत्र के रूप में अपनाएं।
भारतीय रक्षा लेखा सेवा के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह सेवा भारतीय सशस्त्र बलों और संबंधित संगठनों के वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि रक्षा सेवाओं के लेखा और वित्तीय प्राधिकरण के रूप में अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान सशस्त्र बलों को आने वाली चुनौतियों को समझना और उन्हें शामिल करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल तैयारी को सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक वित्तीय प्रबंधन आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने नैतिकता, पारदर्शिता, चौकसी और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, खासकर जब सार्वजनिक धन करदाताओं की मेहनत की कमाई का प्रतिनिधित्व करता है।
उपराष्ट्रपति ने तेजी से तकनीकी और वैज्ञानिक विकास के युग में निरंतर क्षमता निर्माण के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को प्रोत्साहित किया कि वे जीवन भर सीखने के लिए आईजीओटी क्रम योगी जैसे प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग करें।
सार्वजनिक सेवा में मूल्यों पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान आवश्यक है लेकिन चरित्र सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों में से उन्हें समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक दुर्लभ अवसर दिया गया है और उन्हें इस जिम्मेदारी को विनम्रता और लगन से निभाना चाहिए।
विकसित भारत की ओर यात्रा में सरकारी कर्मचारियों से अपेक्षाओं के बारे में एक प्रशिक्षित अधिकारी के प्रश्न के उत्तर में उपराष्ट्रपति ने उन पर जोर दिया कि वे नवाचारी, आधुनिक प्रौद्योगिकी के अनुसार अनुकूलन करने वाले, अपने काम में उत्साही, दृष्टिकोण में सहानुभूतिपूर्ण और प्रशासन में नैतिक रहें।
इस अवसर पर रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह; नियंत्रक महालेखा परीक्षक रक्षा लेखा श्री विशोजीत सहाय, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) श्री राज कुमार अरोड़ा सहित अन्य ने भाग लिया।

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