आरएसएस का युवाओं और महिलाओं पर ध्यान बढ़ाने का फैसला


राउस अवेन्यू कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर आरोप पत्र पर नोटिस लेने से इनकार कर दिया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगाई ने ईडी के आरोप पत्र पर नोटिस लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने 7 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। 6 सितंबर को ईडी ने सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा 4 जुलाई 2014 को ईडी के पास दर्ज की गई शिकायत की एक प्रति और 30 जून 2021 के एक दस्तावेज़ को पेश किया था। सुनवाई के दौरान ईडी ने कहा कि जिन लोगों ने कांग्रेस पार्टी को चंदा दिया उन्हें धोखा दिया गया। ईडी ने कहा कि चंदा देने वालों में से कुछ को टिकट दिए गए थे। ईडी ने गांधी परिवार के इस तर्क का विरोध किया कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। उन्होंने कहा कि एजेएल ही मूल रूप से नेशनल हेराल्ड का प्रकाशक था। इस मामले में राहुल गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील आरएस चीमा ने कहा था कि कांग्रेस ने एजेएल को बेचने की कोशिश नहीं की, बल्कि वह इस संस्थान को बचाना चाहती थी, क्योंकि वह स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा थी। चीमा ने सवाल किया कि ईडी एजेएल का मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन क्यों तैयार नहीं कर रहा है। एजेएल की स्थापना 1937 में जवाहरलाल नेहरू, जेबी कृपलानी, रफी अहमद किदवई और अन्य कांग्रेसी नेताओं ने की थी। चीमा ने तर्क दिया कि एजेएल के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में कहा गया है कि इसकी सभी नीतियां कांग्रेस की होंगी। सोनिया गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि ईडी ने एक आश्चर्यजनक और अप्रत्याशित मामला बनाया है। यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला था जिसमें संपत्ति का कोई उल्लेख नहीं था। सिंघवी ने तर्क दिया कि यंग इंडिया ने एसोसिएटेड जनरल्स लिमिटेड को कर्ज से मुक्त करने के लिए पूरी कार्रवाई शुरू की थी। हर कंपनी कर्ज से मुक्त होने के लिए कानूनी कदम उठाती है। सिंघवी ने तर्क दिया कि ईडी ने वर्षों से कुछ नहीं किया और व्यक्तिगत शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू की। 2 मई को अदालत ने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सात आरोपियों को नोटिस जारी किया था। ईडी ने 15 अप्रैल को अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। ईडी ने इस मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सैम पित्रोदा को आरोपी बनाया है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम की धारा 44 और 45 के तहत शिकायत दर्ज की है।







