
राष्ट्रपति के अभिभाषण में सच्चाई नहीं झलकती: राज्यसभा में विपक्ष
राज्यसभा में मंगलवार को विपक्ष ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में दिखाई गई सरकार की उपलब्धियों को जमीनी हकीकत से दूर बताया और कहा कि सरकार इस तरह के "प्रचार" को ही सफलता मानती है।
बजट सत्र की शुरुआत पर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दूसरे दिन कांग्रेस पार्टी के रजनी आशोक राव पाटिल ने कहा कि "राष्ट्रपति के अभिभाषण से जमीनी सच्चाई और आम जनता की तकलीफ का अंदाजा नहीं लगता।" उन्होंने कहा कि इसमें उच्च विकास दर की बात तो कही गई है मगर यह नहीं बताया गया कि इसका फायदा किसे मिल रहा है। कृषि उत्पादन में वृद्धि के आंकड़े दिए गए हैं लेकिन किसानों की आय नहीं बढ़ रही है। निर्यात में कमी का असर आय, व्यवसाय और रोजगार पर पड़ रहा है। अमेरिका में भारतीय माल पर उच्च आयात शुल्क से कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद जैसे श्रमसाध्य क्षेत्रों पर बुरा प्रभाव पड़ा है।
श्रीमती पाटिल ने अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते के घोषणा का उल्लेख करते हुए चिंता व्यक्त की कि इससे भारत का कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि इसकी जानकारी पहले अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान दी गई। उन्होंने इस समझौते पर सदन में प्रधानमंत्री की ओर से बयान देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि "हमारा विरोध इस सोच के खिलाफ है जो प्रचार को ही सफलता मानती है... विकास केवल मौखिक जमाखोरी से नहीं होगा।"
चर्चा के दूसरे दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ सदस्य घनश्याम तिवारी ने अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति और जनजाति की उपेक्षा के विपक्ष के आरोप को खारिज किया। उन्होंने कहा कि "हमें (भाजपा) राष्ट्रपति बनाने के तीन अवसर मिले और हमने ज़करातुलैन हैदर (मुसलमान), राम नाथ कोविंद जी (अनुसूचित जाति) और अब द्रौपदी मुर्मू (आदिवासी) को बनाया।"
आरएसएस के विचारों पर सदन में कुछ विपक्षी सदस्यों के हमलों के जवाब में तिवारी ने कहा कि वे खुद पुराने स्वयंसेवक हैं। संघ के कार्यक्रमों के सामूहिक गान में मातृभूमि के लिए श्रद्धा और उसे शानदार बनाने की प्रार्थना की जाती है।
उन्होंने संघीयता को लेकर सरकार पर हमला करने वाले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सदस्यों को जवाब देते हुए कहा कि भारत की संघीयता अमेरिकी संघीयता नहीं है। हमारी संघीय प्रणाली एक एकीकृत संघीयता है। यहां केंद्र के पास राज्यों की सीमाएं बदलने और नई राज्य बनाने का अधिकार है।
तृणमूल कांग्रेस के रीताब्रता बनर्जी ने बंगाली में अपना बयान देते हुए सरकार की सोच और कार्यों पर हमला किया और भारतीय प्रेस परिषद के पुनर्गठन में देरी का मुद्दा भी उठाया।
धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए वाईएसआर कांग्रेस के गोला बाबू राव ने मोदी सरकार की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था को चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था तक ले जाने और 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता का विशेष रूप से उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने आंध्र प्रदेश में रेलवे सुविधाओं पर उचित ध्यान नहीं दिए जाने की शिकायत की। उन्होंने आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर बन रहे पोलावरम बांध की ऊंचाई को कथित तौर पर 45 मीटर से घटाकर 41 मीटर करने की प्रस्ताव की आलोचना की और कहा कि ऊंचाई घटाने से राज्य के कई क्षेत्रों को बाढ़ से नुकसान होगा।
बीजू जनता दल के डॉ. सस्मित पात्रा ने पोलावरम बांध की ऊंचाई कम करने की ओडिशा के लोगों की मांग उठाई। उन्होंने शिकायत की कि सरकार की "पूर्वोदय" योजना में ओडिशा के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव ने कहा कि सरकार "सबका साथ सबका विकास" का नारा देती है लेकिन इसके शासनकाल में वंचित और पिछड़े वर्गों के लिए पर्याप्त अवसर पैदा नहीं किए जा रहे हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के डॉ. जॉन ब्रिटास ने अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते के घोषणा पर सवाल उठाए और कहा कि संसदीय सत्र के दौरान नीति से संबंधित मामलों की जानकारी संसद में ही दी जाती है तो इस परंपरा को क्यों नहीं निभाया गया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से सोशल मीडिया पर समझौते के बारे में साझा की गई बातों पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस समझौते पर सदन में बयान दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी कृषि मंत्री ने राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया है कि उन्होंने भारत के कृषि बाजार को अमेरिका के लिए खोल दिया है तो क्या यह बात सच है? उन्होंने फिलिस्तीन, वेनेजुएला, ग्रीनलैंड और ईरान के मुद्दों पर भारत की विदेश नीति पर भी
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