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इधर हम आये ममता की रैली में, उधर ममता ने उन्हें निलंबित कर दिया

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कोलकाता, ५ दिसंबर । तृणमूल कांग्रेस ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के भारतपुर क्षेत्र से विधायक हमायूं कबीर को निलंबित कर दिया। शहरी विकास मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। उनके साथ मुर्शिदाबाद से संबंधित दो वरिष्ठ नेता थे: राज्य मंत्री अखिलमणि और हरिहरपारा के विधायक नेमत शेख। दोनों नेताओं ने पार्टी के फैसले को सही ठहराया।
इस संबंध में हमायूं कबीर ने दावा किया कि उन्हें अभी तक अपने निलंबन से संबंधित कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मैं पुष्टि के बिना कुछ नहीं कहूंगा, सही समय का इंतजार करें, मुझे बहुत कुछ कहना होगा। विधायक ने यह भी घोषणा की कि वह अगले हफ्ते अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
हमायूं कबीर जब से ६ दिसंबर को बेल्डांगा में बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा की थी, तब से पार्टी नेतृत्व के गुस्से का सामना कर रहे थे। इस मामले में तृणमूल का रुख स्पष्ट था: धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाली राजनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद हमायूं अपने बयान से पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि बाबरी मस्जिद के विनाश के दिन मस्जिद के निर्माण की घोषणा करने से सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। हकीम ने कहा कि यद्यपि किसी मस्जिद के निर्माण पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन धार्मिक भावनाओं को भड़काना अस्वीकार्य है। हमायूं का यह कदम राज्य की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा बन सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि हमायूं कबीर बहरामपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रैली में उस समय मौजूद थे जब कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके निलंबन की घोषणा की गई। अपने निलंबन की जानकारी मिलते ही वह पंडाल से बाहर निकल गए।
पंडाल से निकलते हुए उन्होंने कहा, "मैं २२ दिसंबर को नई पार्टी की घोषणा करूंगा। मैं १३५ सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करूंगा। मैं तृणमूल और भाजपा को हमायूं कबीर की ताकत दिखाऊंगा।"
यह पहला मौका नहीं है जब हमायूं कबीर को तृणमूल से निलंबित किया गया हो। २०१५ में उन्हें छह साल के लिए पार्टी से भी निकाल दिया गया था। इसके बाद उन्होंने २०१६ का चुनाव आजाद उम्मीदवार के रूप में लड़ा और हार गए। इसके बाद वे कांग्रेस पार्टी में वापस आ गए। २०१९ में, उन्होंने भाजपा में शामिल होकर लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन असफल रहे। २०२१ के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, वे तृणमूल में वापस आए और भारतपुर सीट जीती।
विधायक बनने के बाद भी उनके विवादों के साथ संबंध बने रहे। उन्हें कई शोकॉज नोटिस मिले, माफी मांगी, लेकिन कुछ समय बाद वे फिर से विवादित बयानों के साथ सुर्खियों में आ गए।
इस बार पार्टी नेतृत्व चुनाव से पहले कोई खतरा उठाने को तैयार नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना था कि हमायूं के रुख से भाजपा को सीधा फायदा हो सकता है। इसलिए उन्हें पार्टी से पूरी तरह से निकालने का फैसला किया गया।

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