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बिहार

अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा समय की सबसे बड़ी जरूरत : पूर्व विधायक डॉ. इजहार अहमद

Awaze Bihar2 मिनट पढ़ें

27 सितंबर को पटना में एक अहम बैठक होगी. मौलाना उबैदुल्लाह खान आजमी, अस्मा जहरा समेत देश के अन्य प्रमुख विद्वान और बुद्धिजीवी संबोधित करेंगे.

अजीमाबाद: देश में मुसलमानों की वर्तमान स्थिति, शैक्षिक पिछड़ेपन, राष्ट्रीय एकता मस्जिदों और कब्रों की सुरक्षा, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर 27 सितंबर को अजीमाबाद में एक भव्य बैठक होगी. बैठक में मुसलमानों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी उपायों के साथ-साथ देश की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में उनके सामने आने वाली समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। वक्ता देश की विभिन्न महत्वपूर्ण समस्याओं और मुसलमानों की शैक्षिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। कार्यक्रम को पूर्व सांसद एवं सुप्रसिद्ध निर्भीक वक्ता मौलाना उबैदुल्लाह खान आजमी, डॉ अस्मा जहरा, डॉ अनीस अहमद, डॉ प्रो आफताब आलम, अराम रब्बानी एवं सलीम खान संबोधित करेंगे. वक्ता मुसलमानों के शैक्षिक पिछड़ेपन, सामाजिक मुद्दों, राष्ट्रीय एकता और अल्पसंख्यक अधिकारों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे।
बैठक के संयोजक एवं बिहार के पूर्व विधानसभा सदस्य एवं प्राक्कलन समिति के सभापति डॉ. इजहार अहमद ने कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिकूल परिस्थिति में अल्पसंख्यकों को कई समस्याओं एवं चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे समय में जरूरी है कि अल्पसंख्यकों की समस्याओं को गंभीरता से सामने लाया जाए और सामूहिक स्तर पर उनके समाधान पर विचार किया जाए. उन्होंने कहा कि बैठक का उद्देश्य किसी विशेष समूह के खिलाफ माहौल बनाना नहीं है, बल्कि मुसलमानों सहित सभी अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों और राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने से संबंधित मुद्दों पर सार्थक चर्चा करना है. उन्होंने कहा कि शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और देश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अल्पसंख्यकों की प्रभावी भागीदारी जैसे मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
डॉ इज़हार अहमद ने मुसलमानों से अपील की कि वे 27 सितंबर को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में बड़ी संख्या में भाग लें और देश की मौजूदा स्थिति में अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर इस सामूहिक चर्चा का हिस्सा बनें. उन्होंने कहा कि बैठक में प्रस्तुत विचारों एवं सुझावों को सकारात्मक एवं रचनात्मक दिशा देने का प्रयास किया जायेगा। राजकीय उर्दू लाइब्रेरी के पूर्व अध्यक्ष अरशद फिरोज ने कहा कि यह समय की मांग है कि अल्पसंख्यकों की समस्याओं पर खुलकर चर्चा हो और हमारी बातें सदन में बैठे लोगों तक पहुंचें ताकि समय रहते समस्याओं का समाधान हो सके. समीक्षा बैठक में बारी आजमी, नवाब अतीक-उज्जमां, डॉ. अब्दुल बासित हमीदी, डॉ. नौमान कैसर, अजहर-उल-हक, शाहिद-उल-हक, मुहम्मद हसनैन, परवेज आलम, अकबर अली, साजिद अली खान मुहम्मद रफी आदि भी मौजूद रहे।

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