सामग्री पर जाएँ
राष्ट्रीय

वंदे मातरम का संविधानिक रूप से पढ़ाया जाना असंवैधानिक और अस्वीकार्य है, सरकार नोटिफिकेशन वापस ले: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

Awaze Bihar2 मिनट पढ़ें

नई दिल्ली, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार के उस नोटिफिकेशन पर कड़ा विरोध किया है, जिसके तहत केंद्र सरकार ने वंदे मातरम गीत के सभी श्लोकों का सरकारी समारोहों और स्कूलों में राष्ट्रगीत जन गण मन से पहले पढ़ाया जाना अनिवार्य कर दिया है। बोर्ड ने इसे असंवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फजलुर रहमान मुजद्दिदी ने एक प्रेस बयान में केंद्र सरकार के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह फैसला असंवैधानिक, धार्मिक स्वतंत्रता और सेक्युलर मूल्यों के विरुद्ध, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ और मुसलमानों के विश्वास के विपरीत है, इसलिए मुसलमानों के लिए यह किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। मौलाना ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव और संविधान सभा की चर्चा के बाद इस बात पर सहमति हुई थी कि इसके केवल दो श्लोक ही पढ़े जाएंगे। एक सेक्युलर सरकार किसी एक धर्म के विश्वास और शिक्षाओं को दूसरे धार्मिक वर्गों पर जबरन थोप नहीं सकती। यह गीत बंगाल के परिप्रेक्ष्य में लिखा गया था और इसमें दुर्गा और अन्य देवियों और देवताओं की पूजा और वन्दना की बात कही गई है। पश्चिम बंगाल के चुनाव से पहले इसके लागू किए जाने के पीछे भाजपा सरकार की जो भी मंशा हो, मुसलमान इसे कभी भी स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि यह उनके विश्वास और धर्म के विपरीत है। मुसलमान केवल एक अल्लाह वحدह ला शरीक की ही पूजा करता है, इस्लाम खुदा की ذات में जरा भर भी शिर्क को बर्दाश्त नहीं करता। बोर्ड के महासचिव ने आगे कहा कि देश की अदालतों ने भी इसके अन्य श्लोकों को सेक्युलर मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए उनके पढ़े जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसलिए केंद्र सरकार से हमारी मांग है कि वह तुरंत इस नोटिफिकेशन को वापस ले, अन्यथा बोर्ड इसे अदालत में चुनौती देगा।

अन्य भाषा में: English · اردو

साझा करें:

संबंधित समाचार