
साइमा खान ने दूसरी बार यूपीएससी परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया
यह कहा जाता है कि 'मंजिल वह पाता है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।' इस मुहावरे को जिला गाजीपुर के क्षेत्र कमसारबार की बेटी साइमा सराज खान ने यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर साबित कर दिया है।
साइमा के पिता सराज अहमद खान एक सफल बिजनेसमैन और बिल्डर हैं। उनका संबंध गाजीपुर के मुस्लिम बहुल क्षेत्र कमसारबार के उसिया गांव से है, जबकि उनका आवासीय भवन कोलकाता के अलीपुर क्षेत्र में है। साइमा कोलकाता के संस्थान एजुकेट आईसीएस अकादमी से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के तहत आईएएस और आईएफएस की तैयारी कर रही थीं। कमसारबार से संबंध रखने वाली साइमा खान ने एक बार फिर यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर नई मिसाल कायम की है। उन्होंने इससे पहले भी यह कठिन परीक्षा पास की थी, जिसमें उनका रैंक 165 था जबकि इस बार उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 135वां रैंक हासिल किया है। इस सफलता के साथ वे उन प्रमुख महिलाओं में शामिल हो गई हैं जिन्होंने दो बार सिविल सेवाओं की इस प्रतिष्ठित परीक्षा पास की है। साइमा की यह सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी।
यह ध्यान देने योग्य है कि यूपीएससी 2023 के परिणाम के घोषित होने के बाद अपनी चौथी परीक्षा प्रयास में उन्होंने 165वां रैंक हासिल किया और कमसारबार की पहली महिला सिविल सेवा अधिकारी बनने का सम्मान प्राप्त किया। साइमा का संबंध जसिया के निवासी प्रसिद्ध शिक्षाविद् दिवंगत डिप्टी सईद खान के परिवार से है। वे तीन भाइयों में इकलौती बहन हैं।
साइमा की अधिकांश शिक्षा कोलकाता में हुई। उन्होंने अपनी आठवीं कक्षा तक की शिक्षा सेंट पॉल्स बोर्डिंग एंड डे स्कूल कदरपुर से प्राप्त की। इसके बाद साइमा ने अशोक हॉल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल से बारहवीं कक्षा पूरी की और फिर सेंट जेवियर्स कॉलेज में प्रवेश लिया।
स्नातक के दौरान उन्होंने समाजशास्त्र में ऑनर्स किया। इसी दौरान उनके मन में सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में काम करने का जुनून पैदा हुआ। साइमा एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) से भी जुड़ी रहीं। वे कहती हैं कि जब वे जमीनी स्तर पर लोगों से मिलीं और उनकी समस्याओं को देखा तो उन्हें महसूस हुआ कि वे उनके लिए कुछ करना चाहती हैं, चाहे वह छोटा ही क्यों न हो।
उन्होंने कहा कि इस तरह के काम के लिए किसी न किसी संस्थागत अधिकार की आवश्यकता होती है और इसी सोच ने उन्हें यूपीएससी परीक्षा देने का निर्णय लेने पर प्रेरित किया। साइमा एजुकेट आईएएस अकादमी की छात्रा रह चुकी हैं और प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) पास करने के बाद कुछ समय उसी संस्थान में अन्य अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन भी करती रहीं।
अपनी तैयारी के सफर के बारे में साइमा ने बताया कि उन्होंने कई साल तक सोशल मीडिया और सामाजिक गतिविधियों से लगभग दूरी बना ली थी। उन्होंने कहा कि वे चार से पांच साल तक रिश्तेदारों के यहां जाना या शादी विवाह के समारोह में भाग लेना लगभग छोड़ चुकी थीं। उनकी एकमात्र सामाजिक गतिविधि यह थी कि वे कभी-कभार महीने में एक बार अपने बचपन के दोस्तों से मिल लेती थीं। उन्होंने बताया कि उनके अध्ययन का कोई निश्चित समय नहीं था लेकिन वे जितना संभव हो उतना अध्ययन पर समय व्यतीत करती थीं।
अपने इस कठिन सफर का उल्लेख करते हुए साइमा ने कहा कि असफलता उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। तीन बार परीक्षा में असफल होने के बाद उन्हें लगभग हर दिन हिम्मत हारने का विचार आता था लेकिन उनके पास अपने करियर के लिए कोई दूसरा योजना नहीं थी। उनके सभी सपने यूपीएससी से जुड़े थे और वे जानती थीं कि अगर उन्हें कुछ हासिल करना है तो इसी रास्ते से होगा।
साइमा की सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं बल्कि मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा और स्वायत्तता का एक मजबूत उदाहरण भी है। एक ऐसे समाज में जहां अभी भी बहुत सी लड़कियों को शिक्षा और करियर के अवसर सीमित मिलते हैं, साइमा की सफलता यह संदेश देती है कि अगर परिवार का समर्थन और आत्मविश्वास हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। वे विशेष रूप से मुस्लिम लड़कियों को संबोधित करते हुए कहती हैं, सपने देखना और उन्हें पूरा करने का प्रयास करना हर लड़की का अधिकार है। महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफल हो सकती हैं, बस उन्हें अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
यह कहा जाता है कि इतिहास खुद को दोहराता है और मंजिल प्राप्त करने के लिए कोई बहाना नहीं होता। साइमा ने अपने स्पष्ट उद्देश्य, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर यह साबित कर दिया कि महिलाएं भी बड़ी सफलताएं प्राप्त कर सकती हैं।
कोलकाता को अन्यथा '
संबंधित समाचार

आरएसएस का युवाओं और महिलाओं पर ध्यान बढ़ाने का फैसला

अरुणाचल में चीन के साथ झड़प पर सरकार सच छिपा रही है, देश को पूरी जानकारी दी जाए: खरगे

