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राजनीति

राज्यों के मनरेगा बकाया के लिए 30,000 करोड़ रुपये का आवंटन: सीता रमन

Awaze Bihar4 मिनट पढ़ें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मनरेगा के लंबित बिलों के भुगतान के संबंध में विपक्षी सदस्यों की चिंताओं को खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि इस वर्ष के लिए अनुपूरक मांगों की दूसरी सूची में इसके लिए 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे 31 मार्च तक के बकाया राशि का भुगतान हो जाएगा।

श्रीमती सीतारमण ने लोकसभा में चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुपूरक मांगों की दूसरी सूची और संबंधित विनिमय प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि कुछ सदस्यों ने मनरेगा के भुगतान के संबंध में चिंता व्यक्त की है, इसलिए उन्हें बताना जरूरी है कि 'जे राम जी' कानून अप्रैल से शुरू होगा। सरकार ने मनरेगा के लंबित मामलों के भुगतान के लिए इस सूची में व्यवस्था की है।

उन्होंने 'विकास भारत जी राम जी बिल' के बाद राज्यों के लंबित बिलों के संबंध में विपक्षी सदस्यों की चिंता के जवाब में कहा कि "जब हम वी बी-जी राम-जी बिल लेकर आए थे, उस समय 95,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। यह बजट में शामिल है। वित्त बिल पास होने के बाद, 1 अप्रैल से इसके तहत 95,000 करोड़ रुपये का प्रावधान लागू हो जाएगा।"

उन्होंने कहा कि "लेकिन इसके अलावा कई राज्यों के पुराने बिल लंबित हैं। वे यही मामला उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि नए प्रावधान लागू होने के बाद उनके पुराने बिलों का क्या होगा?" वित्त मंत्री ने कहा कि "इन पुराने लंबित बिलों के लिए अनुपूरक अनुदान की मांगों की इस सूची में 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे 31 मार्च तक के मनरेगा के बकाया राशि के भुगतान का मामला हल हो जाएगा।"

श्रीमती सीतारमण ने विपक्ष पर कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि "विपक्ष को इसकी बिल्कुल परवाह नहीं है। लेकिन जब वे फिर से यहां खड़े होते हैं तो पूछते हैं, 'मनरेगा के लिए आपने क्या दिया? इस सरकार ने मनरेगा के फंड में कटौती कर दी है। जब मैं जवाब दे रही हूं, जब मैं बजट में किए गए प्रावधानों के बारे में बता रही हूं, तब वे सुनते नहीं हैं और इसके ऊपर वे बेशर्मी से यहां खड़े होकर मेरी आवाज दबाने की कोशिश करते हैं। मैं उनके इस रवैये की कड़ी निंदा करती हूं।"

वित्त मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए "पहले और दूसरे दोनों अनुपूरक मांगों को मिलाकर कुल राशि 4.13 लाख करोड़ रुपये बनती है। हालांकि, इस राशि में से 1.71 लाख करोड़ तकनीकी रूप से अनुपूरक है। इस तरह की ग्रांट की तकनीकी मांग किसी ग्रांट के एक हिस्से में होने वाली बचत को उसी ग्रांट के दूसरे हिस्से में उपयोग करके या उस ग्रांट के अंदर प्राप्त होने वाली अतिरिक्त आय और वसूली से पूरा करने के लिए होती है।"

श्रीमती सीतारमण ने कहा कि "वास्तव में वित्त वर्ष 2025-26 के व्यय के संशोधित अनुमान (आरई) बजट के अनुमानों (बीई) से कम हैं और इस दूसरे अनुपूरक मांग के बाद भी 2025-26 के बजट अनुमान से अधिक कोई अतिरिक्त खर्च नहीं किया गया है।"

वित्त मंत्री ने समाजवादी पार्टी के राम श्रीमणि वर्मा द्वारा चर्चा के दौरान उठाए गए सवाल पर कहा कि एसपी के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में गन्ना किसान भुगतान का इंतजार करते रहते थे। अब ऐसा नहीं है और 9.30 करोड़ किसानों को सीधे लाभ हस्तांतरण के माध्यम से पैसा मिलता है। समाजवादी पार्टी के शासनकाल में किसान आत्महत्या कर लेते थे। पीएम गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 12 लाख करोड़ रुपये के गेहूं और अनाज सहित सहायता गरीबों तक पहुंचाई गई है।

उन्होंने कहा कि "समाजवादी पार्टी थोड़ा सोच ले। जीडीपी बढ़ने से हमारी क्षमता बढ़ती है और इसी क्षमता से हम किसानों तक सहायता पहुंचाते हैं। आज शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 'पीएम किसान' की एक और किश्त जारी कर रहे हैं। अगर पीएम किसान की इस राशि को भी शामिल किया जाए तो कुल मिलाकर किसानों तक 4.27 लाख करोड़ रुपये पहुंचाए गए हैं।"

उन्होंने कहा कि "हमारी सरकार ने स्थिति और तस्वीर दोनों बदल दी है। यह अनुपूरक मांग किसानों के लिए उर्वरक पर अधिक सब्सिडी प्रदान करती है। वैश्विक संकट से निपटने के लिए आर्थिक स्थिरता कोष में वृद्धि की गई है।"

श्रीमती सीतारमण ने वर्तमान चुनौतियों के बीच विपक्ष से सहयोग की उम्मीद करते हुए कहा कि "इन सभी चुनौतियों के लिए हम चाहते हैं कि संसद में हमें अच्छे सुझाव मिलें। लेकिन यहां समाजवादी पार्टी के सदस्य शायरी कर रहे हैं। आप शायरी लिखते रहें, हम इतिहास लिख रहे हैं। हम तस्वीर बदल रहे हैं।"

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