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आबनाए हरमज पर जारी کش्मकश के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता की स्थिति का शिकार हो गई है

Awaze Bihar2 मिनट पढ़ें

तेहरान, 29 अप्रैल (यूएनआई) खाड़ी में स्थित महत्वपूर्ण जलमार्ग होरमुज़ जलसंधि से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी की आपूर्ति होती है, हाल की युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गई है और अब तक पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और युद्ध की शुरुआत के बाद इस जलमार्ग में समुद्री आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 2,000 जहाज खाड़ी में फंस गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यहां तक कि अगर मार्ग खोला भी जाए तो खतरे पूरी तरह से समाप्त नहीं होंगे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को साफ करने में कम से कम 6 महीने लग सकते हैं, जबकि कुछ विश्लेषकों के अनुसार पूरी तरह से खतरा समाप्त करना लगभग असंभव हो सकता है।
दूसरी ओर, बीमा कंपनियों ने भी स्थिति को अत्यधिक अनिश्चित मानते हुए युद्ध के खतरों का बीमा निलंबित या महंगा कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार पहले जहां बीमा की लागत जहाज की कीमत का लगभग 0.25 प्रतिशत थी, वह अब 1 से 5 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मार्ग को फिर से सुरक्षित घोषित करने के लिए आवश्यक है कि पक्षों के बीच स्थायी युद्धविराम, स्पष्ट सुरक्षा गारंटी, बारूदी सुरंगों की प्रभावी सफाई और समुद्री मार्गों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो।
विशेषज्ञों के अनुसार केवल अस्थायी युद्धविराम पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लंबे समय तक समुद्री आवाजाही का बिना किसी रुकावट के जारी रहना आवश्यक है ताकि बीमा कंपनियां विश्वास बहाल कर सकें। ध्यान रहे कि अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इस स्थिति को विश्व इतिहास में तेल की आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा घोषित किया है, जो 1970 के दशक के तेल संकट से भी अधिक गंभीर है।
जापानी स्वामित्व वाले एक सुपर टैंकर ने ईरानी अधिकारियों से आधिकारिक अनुमति मिलने के बाद होरमुज़ जलसंधि को सफलतापूर्वक पार कर लिया है, जिससे अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद रणनीतिक समुद्री मार्ग से जापान को जोड़ने वाली पहली बड़ी तेल की आपूर्ति का संकेत मिला है।

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