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जीवन की परीक्षा का अंतिम लक्ष्य नहीं है, समग्र विकास आवश्यक है: प्रधानमंत्री

Awaze Bihar3 मिनट पढ़ें

नई दिल्ली, 6 फरवरी (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को "परीक्षा पे चर्चा" के नौवें संस्करण में देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों से बातचीत करते हुए कहा कि परीक्षा कभी भी जीवन का अंतिम उद्देश्य नहीं हो सकता। शिक्षा जीवन के निर्माण का एक साधन है और इसका उद्देश्य सर्वांगीण विकास होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अतीत की चिंताओं को छोड़कर शेष समय के बेहतर उपयोग पर ध्यान दें और मानसिक तनाव से मुक्त होकर सीखने की प्रक्रिया से आनंद लें।
मणिपुर के एक छात्र के प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री ने कहा कि जो बीत गया है उसे गिनने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। अपने जीवन से एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को उनके जन्मदिन के अवसर पर एक नेता ने फोन किया और कहा कि वे अब 75 वर्ष के हो चुके हैं जिस पर उन्होंने उत्तर दिया कि अभी 25 वर्ष बाकी हैं। उन्होंने कहा कि जो बीत चुका है उसे गिनता नहीं है। वह गिनता है जो बाकी है। उन्होंने छात्रों पर जोर दिया कि वे इसी तरह का व्यवहार अपनाएं और कहा कि जो बीत चुका है उसे गिनने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि जो बाकी है उसे जीने के बारे में सोचना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अच्छे शिक्षक वे होते हैं जो केवल परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने पर नहीं बल्कि छात्रों के समग्र विकास पर ध्यान देते हैं। जीवन केवल परीक्षाओं के इर्द-गिर्द नहीं घूमता, और परीक्षाएं केवल स्व-मूल्यांकन का साधन हैं।
जब अध्ययन के विभिन्न तरीकों से संबंधित भ्रम के बारे में पूछा गया तो प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्थिति जीवन भर बनी रहती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी लोग उन्हें काम करने के विभिन्न तरीकों पर सलाह देते हैं। इसका सलाह जरूर लेना चाहिए लेकिन वही करे जो उसके स्वभाव और परिस्थितियों के अनुसार हो।
एक छात्र की शिकायत के उत्तर में कि उनका शिक्षक बहुत तेजी से पढ़ा रहा है, प्रधानमंत्री ने शिक्षक के दृष्टिकोण से बात करते हुए कहा कि शिक्षकों को छात्रों से एक कदम आगे रहना चाहिए, ताकि लक्ष्य कठिन रहें लेकिन असंभव न हों। उन्होंने छात्रों को पाठ का पहले से अध्ययन करके अपने शिक्षकों से दो कदम आगे रहने की सलाह दी।
कौशल विकास पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन कौशल और पेशेवर कौशल दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। संतुलन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे संतुलन खोना चिंता का कारण बनता है वैसे ही जीवन के किसी एक पहलू पर बहुत अधिक जोर देना हानिकारक हो सकता है।
गेमिंग से संबंधित प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री ने कहा कि गेमिंग एक कौशल है और व्यक्तित्व विकास में मददगार साबित हो सकता है लेकिन इसका उपयोग केवल मनोरंजन या जुए के रूप में नहीं करना चाहिए। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल गेम खेलने के बजाय गेम निर्माता बनें और भारतीय संस्कृति और कहानियों पर आधारित गेम विकसित करें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा को बोझ नहीं बनाना चाहिए और इसमें सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे सोने से पहले अगले दिन के कार्यों की सूची बनाएं और दिन के अंत में स्वयं का मूल्यांकन करें।
कार्यक्रम के दौरान सिक्किम की एक छात्रा श्रिया प्रधान ने हिंदी, नेपाली और बंगाली में अपना गीत प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने आसामी गमचा का उल्लेख करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण और उत्तर-पूर्व की हस्तशिल्प का प्रतीक बताया। कार्यक्रम के आरंभ में प्रधानमंत्री ने सभी छात्रों को आसामी गमचा भेंट किया। छात्रों से विकसित भारत के निर्माण में भाग लेने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे वर्ष 2047 में देश की सबसे सक्रिय पीढ़ी होंगे और उन्हें अभी से इसके लिए तैयारी करनी चाहिए।

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