आरएसएस का युवाओं और महिलाओं पर ध्यान बढ़ाने का फैसला


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का मंत्र बने गीत 'वंदे मातरम' की गूंज ने न केवल अंग्रेजों की नींद उड़ा दी थी, बल्कि पूरे हिंदुस्तान में जोश और उत्साह का ऐसा माहौल पैदा किया था जो न केवल आजादी का मंत्र बना, बल्कि आजाद हिंदुस्तान के लिए भी एक विजन के रूप में सामने आया।
सोमवार को लोकसभा में गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए मोदी ने कहा कि यह गीत आजादी की पुकार बन गया था और हर नागरिक इस गीत से प्रभावित होकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहा था। इस गीत से देश में जो नया माहौल पैदा हुआ, उसे देखकर अंग्रेज घबरा गए थे, इसलिए उन्होंने इस गीत पर प्रतिबंध लगा दिया और इसे गाने को अपराध मानकर लोगों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम एक ऐसा दौर था जिसमें इतिहास की कई प्रभावशाली मिसालें देश के सामने मौजूद हैं। जब वंदे मातरम के 100 साल पूरे हुए थे, तो उस समय इसकी शताब्दी समारोह बड़े धूमधाम से मनाई जानी चाहिए थी, लेकिन उस समय देश को आपातकाल में धकेल दिया गया था और देश के नागरिकों का गला घोंटा जा रहा था। देश की आजादी की लड़ाई को मजबूती देने वाले वंदे मातरम के 100 साल पूरे होने के समय देश को आपातकाल के अंधेरे दौर में धकेल दिया गया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम पर चर्चा में कोई शासक दल या विपक्ष नहीं है क्योंकि इसी गीत की प्रेरणा के कारण हम सब यहां बैठे हैं और यह हम सभी के लिए एक पवित्र त्योहार है। आजादी की लड़ाई वंदे मातरम के जोश से लड़ी गई थी और इस गीत के जोश में आजादी के दीवाने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम एक ऐसे समय में लिखा गया था जब 1857 के विद्रोह से ब्रिटिश साम्राज्य हिल गया था और देश की महान शख्सियतों को मजबूर किया जा रहा था। जब वंदे मातरम की आवाज हर जगह गूंज रही थी और देश को गुलाम बनाए रखने की एक बड़ी साजिश चल रही थी, तो इस स्थिति को बंकिम चंद्र चटर्जी चुनौती दे रहे थे। उन्होंने 1882 में उपन्यास "आनंदमठ" लिखा, जिसमें वंदे मातरम गीत शामिल किया गया था, जिसने देश में आजादी की भावना को जगाया। देश के लोगों में जो जोश था, जो संस्कृति थी, उसे वंदे मातरम गीत के माध्यम से देश को एक बड़ा उपहार दिया गया। वंदे मातरम सिर्फ आजादी की लड़ाई का मंत्र नहीं था, सिर्फ अंग्रेजों को भगाने का मंत्र नहीं था, बल्कि यह इस धरती को जंजीरों से आजाद कराने की एक पवित्र लड़ाई भी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर वंदे मातरम के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि स्वार्थी राजनीति के दबाव में कांग्रेस वंदे मातरम के विभाजन के लिए झुकी और मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए। मोदी ने सोमवार को लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि वंदे मातरम के खिलाफ मुस्लिम लीग की विरोध की राजनीति तेज हो रही थी। मोहम्मद अली जिन्ना ने 15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ में वंदे मातरम के खिलाफ नारा लगाया था, तो कांग्रेस के उस समय के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अपना तख्त सरकता नजर आया। जवाहरलाल नेहरू ने ऐसे समय में मुस्लिम लीग को जवाब देने और कांग्रेस की वंदे मातरम से वफादारी को प्रदर्शित करने के बजाय वंदे मातरम की जांच शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि विरोध के पांच दिन बाद 20 अक्टूबर को जवाहरलाल नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखा और इसमें उन्होंने जिन्ना के भावनाओं से अपनी सहमति व्यक्त की, जिसमें कहा गया था कि यह गीत मुसलमानों की भावनाओं को चोट पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस को जो पत्र लिखा गया था, उसमें जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि मैंने वंदे मातरम का परिचय पढ़ा है और मुझे लगता है कि इससे मुसलमान भड़क सकते हैं। इसके बाद कांग्रेस की ओर से बयान आया कि 26 अक्टूबर से कांग्रेस की वर्किंग कमिटी की बैठक में वंदे मातरम का जायजा लिया जाएगा। इससे पूरा देश हैरान था। पूरे देश में इसका विरोध हुआ। दुर्भाग्य से कांग्रेस ने वंदे मातरम पर समझौता कर लिया। वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए। कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वार्थी राजनीति के दबाव में कांग्रेस वंदे मातरम के विभाजन के लिए झुकी, इसलिए कांग्रेस को एक दिन हिंदुस्तान के विभाजन के लिए झुकना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य से कांग्रेस की नीतियां आज भी वही हैं। आज भी कांग्रेस और उनके सहयोगी वंदे मातरम पर विवाद खड़ा करने की कोशिश करते हैं।
मोदी ने कहा क







