
महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में मतदान, राजनीतिक परीक्षा, मुंबई बीएमसी चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल गया
महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के लिए मतदान शुरू हो गया है, जिसे राज्य की राजनीति में एक मिनी विधानसभा चुनाव के रूप में देखा जा रहा है। पुणे, कल्याण-डोम्बिवली, कोल्हापुर, नासिक और नागपुर सहित कई शहरों में मतदान जारी है, लेकिन सबसे अधिक ध्यान बृहन्मुंबई नगर निगम के चुनाव पर केंद्रित है, जो राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण मुकाबला बन गया है।
राज्य के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई नगर निगम में इस बार स्थिति असाधारण है, क्योंकि लगभग पच्चीस वर्षों तक अविभाजित शिवसेना के शासन के बाद पहली बार सत्ता की लड़ाई पूरी तरह से खुली नजर आ रही है। इस चुनाव में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पहली बार एक साथ मैदान में हैं, जिससे यह मुकाबला न केवल ठाकरे परिवार बल्कि भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति के लिए भी प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गया है।
बीएमसी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी शिवसेना (शिंदे) पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला गठबंधन भी कड़ा मुकाबला कर रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महायुति के अभियान का नेतृत्व करते हुए विकास और संगठन को केंद्रीय बिंदु बनाया, जबकि ठाकरे बंधुओं ने मराठी मेयर, निगमीकरण के डर और मुंबई की पहचान जैसे मुद्दों को उठाया। मतदान पूरा होने के बाद अब राजनीतिक नज़रें परिणामों पर टिकी हुई हैं, जो राज्य की राजनीति की नई कहानी लिख सकते हैं।
बृहन्मुंबई नगर निगम में कुल 227 सीटें हैं, जो इसे राज्य की सबसे प्रभावशाली निगम बनाती हैं। 2017 के चुनाव में शिवसेना ने मेयर का पद हासिल किया था, लेकिन इस बार राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से अलग हैं। महायुति में भाजपा और शिवसेना (शिंदे) शामिल हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन में शिवसेना (उद्धव), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शरद पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी धड़े शामिल हैं। कांग्रेस ने विंचत बहुजन अघाड़ी से गठबंधन किया है।
निकटवर्ती शहरों ठाणे और कल्याण-डोम्बिवली में महायुति शिवसेना (उद्धव) और एमएनएस के खिलाफ संयुक्त रूप से मैदान में है। ठाणे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का मजबूत गढ़ माना जाता है, जबकि कल्याण-डोम्बिवली में गठबंधनों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में राजनीतिक परिदृश्य अलग है। पुणे में भाजपा आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ रही है, जबकि पिंपरी-चिंचवड़ में असली मुकाबला भाजपा और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के बीच है। उल्लेखनीय बात यह है कि अजीत पवार और शरद पवार के नेतृत्व वाले दोनों एनसीपी धड़े पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में एक साथ आए हैं, जो पवार परिवार के गढ़ में एक असाधारण राजनीतिक परिदृश्य है।
विदर्भ और मराठवाड़ा में भाजपा ने आक्रामक रणनीति अपनाई है। नागपुर में पार्टी ने सभी 151 सीटों पर मैदान में उतरने का फैसला किया है, जहां उसे कांग्रेस और एनसीपी का सामना करना है। छत्रपति संभाजी नगर में भाजपा, शिवसेना (शिंदे) और शिवसेना (उद्धव) के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है, जबकि कुछ क्षेत्रों में AIMIM का प्रभाव भी दिखाई दे रहा है।
अकोला, अमरावती और लातूर जैसे शहरों में भाजपा को कांग्रेस और विंचत बहुजन अघाड़ी से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर महाराष्ट्र और खानदेश क्षेत्र में, जिनमें नासिक, धुले, जलगांव और जालना शामिल हैं, भाजपा को मजबूत स्थिति में माना जा रहा है, हालांकि महाविकास अघाड़ी के घटक दलों से मुकाबला जारी है। नासिक में शिवसेना (उद्धव), एमएनएस, कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी धड़े के संयुक्त प्रयास ने चुनावी स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
मुस्लिम बहुल शहरों जैसे मालेगांव, भिवंडी, नांदेड़ और छत्रपति संभाजी नगर में समाजवादी पार्टी और AIMIM के प्रभाव को निर्णायक माना जा रहा है। वहीं, कोल्हापुर, अछलपुर, अमरावती और अहमदनगर जैसे शहरों में स्थानीय नेताओं, क्षेत्रीय गठबंधनों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
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