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राष्ट्रीय

जब दुनिया की अर्थव्यवस्थाएँ संकट का सामना कर रही थीं, तब भी भारत ने अपना परचम लहराया

Awaze Bihar4 मिनट पढ़ें

राज्यसभा में गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट पर चर्चा जारी रखते हुए सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों ने इसे विकसित भारत का बजट बताया, जबकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि इसमें आम लोगों की अनदेखी की गई है।
महाराष्ट्र से शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि बजट में बुजुर्गों की अनदेखी की गई है। अनुमान है कि 2050 तक लगभग 30 करोड़ नागरिक 60 वर्ष से अधिक आयु के होंगे। रेलवे किराए में दी जाने वाली छूट को कोरोना के दौरान समाप्त कर दिया गया था, जो अब तक बहाल नहीं हुई है। उन्होंने इलाज पर होने वाले खर्चों पर आयकर में छूट की सीमा बढ़ाने की मांग की।
राजस्थान से भाजपा के मदन लाल सैनी ने कहा कि यूपीए के समय में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 98 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर 165 अरब डॉलर हो गया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन गया है। परमाणु ऊर्जा की क्षमता 4,780 मेगावाट से बढ़कर 8,880 मेगावाट हो गई है। वर्तमान सरकार ने नए एम्स, आईआईटी और एयरपोर्ट बनाए। राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण 12 किलोमीटर प्रतिदिन से बढ़कर 28 किलोमीटर प्रतिदिन हो गया है। सरकार ने विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए।
कर्नाटक से कांग्रेस के जी सी चंद्रशेखर ने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते से "मेक इन इंडिया" को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि "अच्छे दिन" और "अमृत कल" का प्रभाव यह हुआ कि 2014 में भाजपा के पास 295 करोड़ रुपये थे, जो अब बढ़कर 10,000 करोड़ हो गए हैं, एक उद्योगपति जिसकी संपत्ति 44,000 करोड़ रुपये थी अब 12-13 लाख करोड़ रुपये हो गई है, लेकिन किसानों की आय अब तक दोगुनी नहीं हुई है। उन्होंने बजट को कॉरपोरेट के हित में बताया।
बिहार से भाजपा के शंभू शरण पटेल ने कहा कि यह बजट 2047 तक भारत को विकासशील से विकसित देश बनाने वाला है। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और कुछ वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। मखाना बोर्ड के लिए 3,200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे बिहार के किसान और मजदूर लाभान्वित होंगे।
गुजरात से भाजपा के मैनक कुमार नाइक ने कहा कि विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए यह बजट पेश किया गया है। पिछले 11 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पहुंचाने के लिए सरकार ने योजनाएं बनाईं। इस बजट में यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और विकसित भारत "जी-राम-जी" योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार मिले।
गुजरात से ही भाजपा के केसरी देवसिंह झाला ने बजट की प्रशंसा करते हुए कहा कि जब दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं संकट में हैं, तब भारत अपना परचम लहरा रहा है। जब दुनिया भर में जीडीपी दो से तीन प्रतिशत के बीच है, चीन भी चार से पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, भारत सात प्रतिशत से अधिक की दर से विकास कर रहा है।
केरल से कम्युनिस्ट पार्टी के पी संदोश कुमार ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें आम लोगों के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि बजट में केरल के लिए कुछ नहीं किया गया है। यदि केंद्र को केरल से 100 रुपये की आय होती है, तो कम से कम 50 रुपये वापस मिलने चाहिए, लेकिन केवल 25 रुपये ही वापस मिल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश से भाजपा के अमर पाल मौर्य ने बजट को "अंतोदय" और "गरीब कल्याण" का बजट बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित कर रही थीं, तो विपक्ष ने इसलिए विरोध किया क्योंकि वे एक गरीब परिवार की आदिवासी महिला हैं।
उत्तर प्रदेश से भाजपा की सीमा देवी ने बजट को 2047 के विकसित भारत की नींव बताया और कहा कि महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना से ग्रामीण क्षेत्रों के बुनकरों और कारीगरों को काफी लाभ होगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में एक आयुर्वेदिक संस्थान बनाने की मांग की।
त्रिपुरा से भाजपा के राजीब भट्टाचार्जी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सामाजिक सुरक्षा का दायरा 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है। सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला है। शिक्षा के बजट में 14 प्रतिशत और स्वास्थ्य के बजट में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। उत्तर पूर्व में रेल संपर्क बढ़ाने के लिए 11,486 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मध्य प्रदेश से भाजपा के बंशीलाल गुर्जर ने कहा कि यह बजट गरीब, युवा, किसान और महिलाओं को सशक्त बनाने का बजट है। किसान मोदी सरकार के एजेंडे में पहले स्थान पर हैं। पिछले 11 वर्षों में जो योजनाएं सरकार लाई हैं, उनके माध्यम से किसान मजबूत हो रहा है। इस दौरान कृषि के

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