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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ शुक्रवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से संबंधित दूसरी वैश्विक सम्मेलन का समापन हुआ। दिल्ली के 'भारत मंदिर' में तीन दिन तक चली इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर से आए पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और चिकित्सा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने गहरे और अर्थपूर्ण विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयसेस, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय आयुष मंत्री प्रताप राव जाधव भी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें यह देखकर खुशी हो रही है कि भारत पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय मंच के रूप में उभर रहा है। उन्होंने इस सफल आयोजन पर डब्ल्यूएचओ, आयुष मंत्रालय और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए गर्व की बात है कि 'पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से संबंधित डब्ल्यूएचओ के वैश्विक केंद्र की स्थापना गुजरात के शहर जामनगर में हुई है। श्री मोदी ने कहा कि योग पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसने दुनिया को संतुलन और समन्वय का मार्ग दिखाया है। उन्होंने बताया कि भारत के प्रयासों और 175 से अधिक देशों के सहयोग से संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को योग का विश्व दिवस घोषित किया और आज योग दुनिया के कोने-कोने तक पहुंच चुका है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने योग के प्रचार में उत्कृष्ट सेवाएं करने वाली हस्तियों को 'प्रधानमंत्री पुरस्कार' से भी सम्मानित किया।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि आज दिल्ली में डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया गया है। उन्होंने इसे भारत की ओर से दुनिया को दिया गया एक विनम्र उपहार बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यालय अनुसंधान, नियमन और क्षमता निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में काम करेगा। आयुर्वेद पर बोलते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह स्वास्थ्य की कुंजी के रूप में संतुलन बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि 'संतुलन की बहाली' आज एक वैश्विक आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि जीवनशैली में परिवर्तन, शारीरिक गतिविधि में कमी और आधुनिक सुविधाएं मानव शरीर के लिए स्वास्थ्य की नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं, जो पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही हैं। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की सुरक्षा और प्रामाणिकता पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अश्वगंधा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यह जड़ी-बूटी सदियों से भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का हिस्सा रही है। श्री मोदी ने कहा कि कोविड-19 के दौरान इसकी वैश्विक मांग में वृद्धि हुई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत अब अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित प्रमाणों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अश्वगंधा को बढ़ावा दे रहा है। इस अवसर पर अश्वगंधा पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया। सम्मेलन में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान, डिजिटल प्रौद्योगिकी, एआई टूल्स और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के परस्पर संबंध पर भी चर्चा की गई। दिल्ली घोषणा को भी सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया।
श्री मोदी ने सम्मेलन का समापन इस संदेश के साथ किया कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति स्थानीय से वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ रही है और भारत इस वैश्विक प्रयास में नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।







