सामग्री पर जाएँ
AWAZ E BIHAR

नौजवान نسل को नशे से बचाना देश के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी, 'नशा छोड़ें, जीवन जोड़ें' अभियान को प्रभावी बनाने पर जोर

ज़िया साहब6 मिनट में पढ़ें

राज्य सरकार विकलांग व्यक्तियों की कल्याण और स्वायत्तता के लिए लगातार कदम उठा रही है। उनके अधिकारों की सुरक्षा और जीवन के हर क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करने के लिए संबंधित कानूनों और नियमों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विकलांग व्यक्तियों के लिए बाधा रहित वातावरण के निर्माण के उद्देश्य से विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों के कानून 2016 के अध्याय आठ की धारा 40 से 46 के तहत विभिन्न सरकारी इमारतों और परिसरों को सुलभ बनाया गया है।

पटन, 2 नवम्बर:(एबीएन) युवा पीढ़ी को नशे की दुष्टता से सुरक्षित रखने, नशा विरोधी अभियान को सार्वजनिक आंदोलन बनाने और प्रभावित व्यक्तियों के उपचार व पुनर्वास प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से सामाजिक कल्याण विभाग, बिहार सरकार के तहत दारसर्थ मंजी ऑडिटोरियम, पटन में "नशा छोड़ें, जीवन जोड़ें" के विषय पर राज्य स्तर की कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्घाटन सामाजिक कल्याण विभाग के सचिव वनोद सिंह गंजियाल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को देश की निर्माण व विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए, न कि वह देश और समाज के लिए परेशानी का कारण बने। नशा मक्त भारत अबियन के उद्देश्यों को बिहार की जमीन पर वास्तविकताओं के अनुसार लागू करना और इस पर सख्ती से कार्यान्वयन सुनिश्चित करना सरकार की पहली प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि नशा आज राष्ट्रीय स्तर का एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिसके प्रभाव न केवल युवाओं पर बल्कि उनके परिवारों और पूरे समाज पर भी पड़ रहे हैं। इस कार्यशाला में मुख्यतः तीन महत्वपूर्ण विषय, अर्थात् नशा मक्त भारत अबियन, प्रारंभिक हस्तक्षेप के माध्यम से विकलांगता के बोझ में कमी और "सग्मिया भारत अबियन" (सुलभ भारत अभियान) पर चर्चा की जाएगी। कार्यशाला से प्राप्त सुझाव और राय केंद्रीय सरकार को भी भेजी जाएंगी, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी नीति तैयार की जा सके। इस अवसर पर विमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की प्रबंध निदेशक अनायत खान, सामाजिक सुरक्षा निदेशक डॉक्टर प्रीति और डिरेक्टरी ऑफ एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज इंजली शर्मा भी उपस्थित थीं। नशा मक्त भारत अबियन के तहत उपचार और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करते हुए कार्यशाला से संबोधित करते हुए सामाजिक सुरक्षा निदेशक डॉक्टर प्रीति ने नशा मक्त भारत अबियन की प्रगति और इसके तहत जारी गतिविधियों के विवरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा का अर्थ केवल बुजुर्गों, विकलांग व्यक्तियों और विधवाओं को पेंशन प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को इन गंभीर खतरों से सुरक्षित रखना भी इसकी जिम्मेदारी है, जो उनकी जीवन और परिवार को नष्ट कर सकते हैं। आज नशे की लत युवाओं और परिवारों के लिए एक बड़ा चुनौती बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जब परिवार का कोई युवा या कमाने वाला व्यक्ति नशे की पकड़ में आ जाता है तो पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानियों से जूझता है। इसी कारण एनएपीडीडीआर (NAPDDR) और नशा मक्त भारत अबियन (NMBA) के माध्यम से एक ओर नशे की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, दूसरी ओर नशे से प्रभावित व्यक्तियों के उपचार और पुनर्वास के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। डॉक्टर प्रीति ने जिला कार्यालयों में चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों की नियमित निगरानी करने का निर्देश देते हुए कहा कि नशा विरोधी संदेश को प्रभावी ढंग से आम करने के लिए निकड़ नाटक, कल जथा, डिजिटल माध्यम, ए प्लेटफॉर्म और ऑफलाइन शपथ ग्रहण जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर जोर दिया कि इन कार्यक्रमों के प्रचार और जागरूकता कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने बताया कि बिहार में वर्तमान में 13 नशा छोड़ने के केंद्र काम कर रहे हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्रालय सामाजिक न्याय और विकेन्द्रीकृत प्राधिकरणों द्वारा गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से चलाया जा रहा है। इन केंद्रों की निगरानी राज्य स्तर की संपर्क एजेंसी (SLA) करती है, जबकि केंद्रीय सरकार की ओर से वित्तीय सहायता सीधे संबंधित एनजीओ को प्रदान की जाती है। डॉक्टर प्रीति ने आगे बताया कि नशा मक्त भारत अबियन के तहत गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने, विभिन्न विभागों के बीच तालमेल और नियमित समीक्षा व निगरानी के लिए चीफ सचिव बिहार की अध्यक्षता में राज्य स्तर की समिति गठित की गई है। इसके अलावा जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला समिति और ब्लॉक विकास अधिकारी की अध्यक्षता में ब्लॉक स्तर की समितियाँ भी स्थापित की गई हैं।

उन्होंने कार्यशाला में भाग लेने वाले अधिकारियों से अपील की कि वे इस अभियान की संवेदनशीलता और महत्व को समझते हुए इसे पूरी तरह से लागू करने को सुनिश्चित करें।44,755 इमारतें विकलांग व्यक्तियों के लिए सुलभ बनाई गईंकार्यशाला से संबोधित करते हुए डायरेक्टर, डायरेक्टरेट ऑफ़ इम्पावरमेंट ऑफ़ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज़, एंजली शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार विकलांग व्यक्तियों की कल्याण और स्वायत्तता के लिए निरंतर कदम उठा रही है। उनके अधिकारों की सुरक्षा और जीवन के हर क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करने के लिए संबंधित कानूनों और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि विकलांग व्यक्तियों के लिए बाधा‑मुक्त वातावरण निर्माण के उद्देश्य से विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों के कानून 2016 के अध्याय आठ की धारा 40 से 46 के तहत विभिन्न सरकारी इमारतों और परिसर को सुलभ बनाया गया है।

केंद्रीय सरकार की SIPDA (SIPDA) योजना के तहत बिहार स्टेट एजुकेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 18 और निर्माण विभाग ने तीन सरकारी शैक्षणिक इमारतों में बाधा‑मुक्त सुविधाएँ प्रदान की हैं।उन्होंने कहा कि अब तक राज्य में लगभग 44,755 इमारतों को विकलांग व्यक्तियों के लिए सुलभ बनाया जा चुका है। इसी तरह परिवहन प्रणाली और वेब पोर्टलों को भी सुलभ बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं और अब तक 45 वेबसाइटों को विकलांग व्यक्तियों के उपयोग के लिए उपयुक्त बनाया जा चुका है।एंजली शर्मा ने बताया कि शिक्षा विभाग की ओर से विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों और छात्रों को व्यापक और आसान शैक्षणिक सुविधाएँ प्रदान करने के लिए ब्रेल प्रकाशित सामग्री, ब्रेलर स्लेट, अबैक्स और टेलर फ्रेम जैसे सहायक शैक्षणिक उपकरण प्रदान किए जाते हैं। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर सुलभ सुविधाओं की स्थिति का समय‑समय पर मूल्यांकन भी किया जाता है। इसी क्रम में 2025 और 2026 के दौरान राज्य के विभिन्न प्रमुख सार्वजनिक स्थानों का ‘येस टू एक्सेस ऐप’ के माध्यम से पहुँच से संबंधित ऑडिट किया गया।सभी 101 सब‑डिवीजन के बेसिस सेंटरों के माध्यम से बच्चों को प्रारंभिक चिकित्सा व विकासात्मक सुविधाएँ प्रदान करने की योजनाउन्होंने आगे बताया कि राज्य में जिला स्तर के प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्रों (डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर) की संख्या सीमित होने के कारण दूरस्थ क्षेत्रों के विकलांग और विकास में देरी वाले बच्चों को आवश्यक सुविधाएँ प्राप्त करने में कठिनाई होती है। इस समस्या के समाधान के लिए सामाजिक कल्याण विभाग के तहत राज्य के सभी 101 सब‑डिवीजन में चलने वाले बेसिस सेंटरों के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवाएँ प्रदान करने की योजना बनाई जा रही है।विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर प्रस्तुत किए सुझावकार्यशाला में भाग लेने वाले अधिकारियों और प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी और प्रस्तुति के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान किया। इनमें डॉक्टर शम्भू, एमएस पटना, डॉक्टर ओमा शंकर सनहा, डॉक्टर अशोक कुमार सनहा, बीके अस्निया राज (ब्रह्मा कमारीज़, पटना), संजय कुमार (देविया जीवती, पटना), नेमिता (आर्ट ऑफ़ लिविंग, पटना) और फ़ज़ल रबानी सिद़ीकी (स्कम) शामिल थे।इस अवसर पर डायरेक्टरेट ऑफ़ सोशल सिक्योरिटी, डायरेक्टरेट ऑफ़ इम्पावरमेंट ऑफ़ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज़ और स्कम के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित थे। अंत में डिप्टी डायरेक्टर, सोशल प्रोटेक्शन, गायत्री कमारी ने धन्यवाद व्यक्त किया।नशा मुक्त भारत का वचनकार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने नशा मुक्त भारत अभियान के तहत वचन दिया कि युवा किसी भी देश की ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक होते हैं और समाज व देश के विकास में उनका महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए वे न केवल स्वयं को बल्कि अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी नशे से दूर रखने का हर संभव प्रयास करेंगे और अपने जिले, राज्य और देश को नशे‑मुक्त बनाने में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। उनका संकल्प था कि नशे के खिलाफ इस संघर्ष को सार्वजनिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

ज़िया साहब

संपादक-इन-चीफ

और ख़बरें