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पटलिपुत्र राष्ट्रीय युवा संसद 2.0 का मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन, कहा: जनता की आवाज़ और उम्मीदों का सम्मान ही लोकतंत्र की असली روح है
पटना, 1 नवंबर: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि लोकतंत्र की जड़ें बिहार की ऐतिहासिक धरती से जुड़ी हुई हैं और इसकी स्थिरता, राष्ट्रीय विकास और देश की सांस्कृतिक पहचान के प्रचार में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक महत्व की है। युवा देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के रक्षक और विकसित भारत के निर्माण के वास्तविक वास्तुकलाकार भी हैं। आवश्यकता इस बात की है कि युवा अपनी ऊर्जा, क्षमता और बौद्धिक शक्ति को देश निर्माण, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थिरता के लिए प्रयोग करें।
मुख्यमंत्री रविवार को गुला रोड के रंजन पथ स्थित ज्ञान निकेतन स्कूल के परिसर में आयोजित दो दिवसीय 'पटलिपुत्र राष्ट्रीय युवा संसद 2.0' का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजक समिति के सदस्यों को मूमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी अलहस्त आचार्य केशर कनल की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी।
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में स्वतंत्रता संग्राम के वीरों की अद्वितीय बलिदान और लंबी संघर्ष के परिणामस्वरूप देश को गुलामी से मुक्ति मिली। स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हमें लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों को और मजबूत बनाने का संकल्प लेना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के संकल्प के साथ लगातार काम कर रहे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बिहार को समृद्धि और विकास के मार्ग पर ले जाने के लिए उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं।
उन्होंने 1974 की आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि उस आंदोलन में युवाओं ने जोश और उत्साह के साथ भाग लेकर देश की राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई थी। आज का युग जेनरेशन ज़ी और जेनरेशन एल्फा का है। युवाओं को बदलते हालात की मांगों को समझते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और राष्ट्रीय विकास में अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए आगे आना होगा। पटलिपुत्र राष्ट्रीय युवा संसद जैसे कार्यक्रम नई पीढ़ी में लोकतांत्रिक चेतना, संवैधानिक समझ और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों का अहसास पैदा करने का एक प्रभावी मंच हैं।
जनता का विश्वास ही लोकतांत्रिक सत्ता की असली नींव है
लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना की व्याख्या करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही असली शासक होती है। जनता की भावनाओं, उनके गरव और उनकी उम्मीदों का सम्मान करना हर निर्वाचित सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। जनता ने हमें सेवा और काम करने का अवसर दिया है, इसका मतलब यह नहीं कि हम खुद को सत्ता के मालिक समझने लगें। जनहित में लिए गए निर्णयों और बनाए गए कानूनों का समय-समय पर मूल्यांकन करना भी आवश्यक है और हालात की मांगों के अनुसार जहां आवश्यक हो वहां उनमें बदलाव या उन्हें वापस लेने की साहस भी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार जनता के वोट से अस्तित्व में आती है और इसकी सभी गतिविधियों का केंद्र बिंदु जनकल्याण होना चाहिए। वही नेतृत्व सफल होता है जो जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं और उम्मीदों को समझते हुए नीतियां बनाए और निर्णय ले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार देश का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पांच बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। इन नेताओं ने जनता की उम्मीदों के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के लिए निष्ठा, लगन और जिम्मेदारी के अहसास के साथ काम करने वालों को ही जनता का विश्वास और समर्थन मिलता है। लोकतंत्र में राजसी सोच की कोई जगह नहीं, क्योंकि यहां जनता की आवाज़ ही सबसे अधिक महत्व रखती है।
80 करोड़ लोगों को अनाज, साढ़े पांच करोड़ परिवारों को पक्के मकान
मध्य और राज्य सरकारों की कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के शासनकाल में देश के 5.5 करोड़ लोगों को पके मकान उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है। पीने के साफ पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
उन्होंने कहा कि बिहार में अमीर और गरीब के बीच विभाजन के बिना सभी उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार इस सुविधा के लिए वार्षिक लगभग 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जबकि प्रति परिवार बिजली सब्सिडी पर वार्षिक 8 से 10 हजार रुपये तक का खर्च आ रहा है। मुख्यमंत्री ने खुशहाल, सक्षम और आयकर देने वाले व्यक्तियों से अपील की कि वे स्वेच्छा से 125 यूनिट मुफ्त बिजली सुविधा से परहेज़ करके राज्य की प्रगति में अपना योगदान दें।
उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को चार लाख रुपये तक वित्तीय सहायता
शैक्षिक विकास को राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींव मानते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के छात्रों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को चार लाख रुपये तक वित्तीय सहायता दी जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि बिहार के युवाओं को अपने ही प्रांत में मानक शिक्षा प्राप्त करने के अधिकतम अवसर मिल सकें। ओपन विश्वविद्यालयों की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 534 ब्लॉकों में 700 मॉडल स्कूल 'सरसोटी विद्या निकेतन' के नाम से स्थापित किए गए हैं, जहां लगभग 3.5 लाख छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन स्कूलों के छात्रों को 'विद्यार्थी साथी एप' की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इस एप के माध्यम से छात्रों को किसी विषय में कठिनाई आने पर रात एक बजे भी केवल एक मिनट के भीतर शिक्षक की मार्गदर्शन उपलब्ध हो सकती है। इस प्रकार प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से छात्रों के शैक्षिक समस्याओं के समाधान का मार्ग सुगम किया गया है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और शिक्षा ही प्रगति के मूलभूत साधन हैं और इसी के माध्यम से नई पीढ़ी अपने सपनों को वास्तविकता में बदल सकती है।
नौजवानों की आकांक्षाओं के अनुरूप लोकतांत्रिक नीतियाँ
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा के प्रसार और सुधार के विषय पर फेसबुक लाइव के माध्यम से युवाओं से सीधे संवाद किया था, जिसमें 33 करोड़ युवा भाग ले चुके थे। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र केवल चुनावी प्रक्रिया या सत्ता के हस्तांतरण का नाम नहीं है बल्कि जनता की आवाज, उनके भावनाओं और उनकी अपेक्षाओं की व्याख्या का तंत्र है। जनता और युवाओं की इच्छाओं को समझकर उनके अनुसार कानून बनाना, नीतियाँ तैयार करना और विकास परियोजनाओं को लागू करना ही लोकतंत्र की वास्तविक मांग है।
मुख्यमंत्री ने पटली पतर राष्ट्रीय युवा संसद के संस्थापक साइन कनाल और संसद सदस्य शम्भवी चौधरी को इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन पर बधाई देते हुए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि इस प्रकार के कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि युवाओं में लोकतांत्रिक जागरूकता, राष्ट्रीय निर्माण के उत्साह और सामाजिक जिम्मेदारियों का एहसास लगातार बढ़ता रहे और नई पीढ़ी को देश के मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास अधिक प्रभावी हों।
कार्यक्रम से शिक्षा मंत्री मैथिलेश तिवारी, संसद सदस्य शम्भवी चौधरी और पटली पतर राष्ट्रीय युवा संसद के संस्थापक साइन कनाल ने भी संबोधन दिया। इस अवसर पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी, विधानसभा सदस्य विशाल प्रशांत, सीबीएसई पटन के क्षेत्रीय अधिकारी जंगम सिनिल कमर, ज्ञान निकेतन स्कूल के प्रधानाचार्य शेलिंदर मोहन झा सहित बड़ी संख्या में छात्र और छात्राएँ तथा युवा उपस्थित थे।
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