
मेघालय में अवैध कोयला खदान हादसे में 18 मजदूरों की मौत, बचाव अभियान जारी
शिलांग, मेघालय में अवैध कोयला खनन से साल-दर-साल हादसे होते रहते हैं। एक बार फिर बड़ा हादसा गुरुवार को दोपहर लगभग 11 बजे हुआ। इस हादसे में 18 मजदूरों की जान चली गई। आठ मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पता चला है कि इस खदान में मजदूरों ने डायनामाइट विस्फोट किया। इसके कारण खदान में मौजूद मिथेन गैस के कारण आग लग गई। देखते ही देखते तीन खदानों से आग की लपटें उठने लगीं। हादसे के बाद खदान के बाहर मौजूद अन्य मजदूर भाग गए। सूचना पर पहुंची सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है।
बताया गया है कि कोयला खदान से फिलहाल किसी तरह का धुआं बाहर नहीं आ रहा है। फिर भी पूरी सावधानी बरती जा रही है। पांच फरवरी को एसईडीसी को जानकारी मिली थी कि पूर्व जैंतिया हिल्स जिले के मॉन सांगट-थांगस्को क्षेत्र में कोयला खदान में सुबह लगभग 11 बजे डायनामाइट विस्फोट हुआ। शाम 6.30 बजे प्रारंभिक रिपोर्ट मिली कि 18 मजदूरों की मौत हो गई है और आठ घायल हालत में मिले।
जिला प्रशासन ने सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की बचाव टीमों को मौके पर भेजा। एसडीएमए ने संचार के लिए एमपीआरओ से अनुरोध किया। साथ ही सेना और वायुसेना को स्टैंडबाई पर रहने का अनुरोध किया गया।
गुवाहाटी स्थित पहली बटालियन एनडीआरएफ के कमांडेंट एचपी कुंडारी की अगुआई में एनडीआरएफ की तीन टीमें राहत और बचाव कार्य के लिए हादसे के स्थान के लिए रवाना हुई हैं। हालांकि, हादसे का स्थान दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र में स्थित है। इसके कारण सुरक्षा एजेंसियों को पहुंचने में परेशानी हो रही है।
हादसे के स्थान पर मौजूद पहली बटालियन एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर अनुराग कुमार सिंह ने आज बताया कि आठ सदस्यीय हमारी एक टीम कल रात 11 बजे हादसे के पास पहुंची। राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया है। एनडीआरएफ की तीन टीमें जिनमें दो टीमें गुवाहाटी से मेघालय पहुंची हैं। आज दोपहर तक सभी टीमें मौके पर पहुंच जाएंगी। इसके बाद राहत अभियान में तेजी आएगी।
एनडीआरएफ की टीमें केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (सीबीआरएन) उपकरणों से भी लैस हैं। हादसे का स्थान जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर है और मुश्किल रास्ते के कारण जिला मुख्यालय से वहां पहुंचने में तीन घंटे लगते हैं। वहां केवल 4x4 गाड़ियों से ही पहुंचा जा सकता है।
संबंधित समाचार

आरएसएस का युवाओं और महिलाओं पर ध्यान बढ़ाने का फैसला

अरुणाचल में चीन के साथ झड़प पर सरकार सच छिपा रही है, देश को पूरी जानकारी दी जाए: खरगे

