
कर्तव्य पथ पर सेना की युद्ध रणनीति 'बैटल एरे' की दुर्लभ झलक
गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर पहली बार भारतीय सेना की युद्ध क्षेत्र की विशेष रणनीति 'बैटल एरे' की दुर्लभ झलक देखने को मिली। इस अवसर पर भारतीय सेना ने अपने इस मजबूत और आधुनिक रूप का प्रदर्शन किया जो भविष्य में किसी भी प्रकार के युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को यहां आयोजित समारोह में भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों पर किए गए ऑपरेशन सुंदर की सफलता का जश्न मनाया। इसके तहत सैनिक जवान पहली बार एक अनोखे और विशेष युद्ध विन्यास 'बैटल एरे' फॉर्मेशन में नजर आए। इस दौरान दर्शकों को आधुनिक युद्ध क्षेत्र में एक एकीकृत, नेटवर्क से जुड़े और नवीनतम प्रौद्योगिकी से सुसज्जित सैन्य प्रणाली की दुर्लभ झलक देखने को मिली।
इस वर्ष कर्तव्य पथ पर सेना की झांकी में एक एकीकृत ऑपरेशनल केंद्र का प्रदर्शन किया गया, जिसमें 'सुदर्शन चक्र' के सुरक्षा घेरे के तहत संयुक्त योजना, सटीक लक्ष्यीकरण और वायु रक्षा को प्रदर्शित किया गया। इसके माध्यम से यह दिखाया गया कि आधुनिक युद्धों की योजना कैसे बनाई जाती है और उन पर वास्तविक समय में क्रियान्वित कैसे किया जाता है।
परेड के इतिहास में पहली बार भारतीय सेना के मार्चिंग और मशीनीकृत कॉलम को युद्ध आधार पर आक्रामक विन्यास में संगठित करके प्रस्तुत किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सैन्य कार्रवाइयों के दौरान विभिन्न सुरक्षा तत्वों का उपयोग किस क्रम में किया जाता है।
'बैटल एरे' एक ऐसी भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व करता है जो हर समय तैयार, प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता रखती है, जहां खुफिया, निगरानी और जासूसी तत्व, मशीनीकृत बल, वायु संसाधन, विशेष बल, तोपखाना, वायु रक्षा और लॉजिस्टिक्स को एक एकीकृत ऑपरेशनल ढांचे में समाहित किया गया है।
यह युद्ध विन्यास डेटा पर आधारित कार्रवाइयों, दूरस्थ लक्ष्यों पर सटीक हथियारों और स्थानीय रूप से विकसित प्लेटफार्मों के माध्यम से दुश्मन क्षेत्र में गहराई तक निगरानी, निर्णय लेने और हमले की भारतीय सेना की क्षमता को प्रदर्शित करता है। इसके साथ ही बहुस्तरीय वायु रक्षा घेरे के माध्यम से पूर्ण सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।
'बैटल एरे' वास्तव में ऑपरेशन सुंदर की उल्लेखनीय सफलता का जश्न था, जो भारतीय सेना की युद्ध तैयारी, सहायक बलों के साथ समन्वय और आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित स्थानीय रक्षा प्रणालियों पर बढ़ते निर्भरता को प्रदर्शित करता है।
इस युद्ध रणनीति में टी-90 भीष्म और अर्जुन मुख्य युद्ध टैंक, बीएमपी-2 सारथ, नाग मिसाइल प्रणाली, एएलएच ध्रुव, रुद्र, अपाचे एएच-64ई, एलसीएच प्रचंड जैसे वायु संसाधन, अटाग, धनुष, स्वास्त्र, ब्रह्मोस सहित दूरस्थ लक्ष्यों पर सटीक तोपखाना और मिसाइल प्रणाली, साथ ही आकाश और मध्यम दूरी की भूमि से वायु में मार करने वाली एमआरएसएएम वायु रक्षा प्रणाली शामिल थीं।
इसके अलावा कई प्लेटफार्म और इकाइयां पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुईं, जो सेना की तेजी से आधुनिकीकरण और तकनीकी परिवर्तन को प्रदर्शित करती हैं। इनमें भैरव बटालियन, शक्ति बान रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी, एडवांस्ड टाउड आर्टिलरी गन सिस्टम (155 मिमी), दूरस्थ लक्ष्यों पर सटीक यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, बिना मानव कर्मियों के जमीनी वाहन, रोबोटिक डॉग, ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन से सुसज्जित युद्ध प्लेटफार्म और विशेष रूप से प्रशिक्षित बैक्टेरियन ऊंट, जांस्कर टट्टू, शिकारी पक्षी और स्वान शामिल हैं।
परेड में सेना की छह मार्चिंग टुकड़ियों ने भाग लिया, जिनमें ऑपरेशनल भूमिका में शामिल मिश्रित स्काउट्स टुकड़ी, राजपूत रेजिमेंट, असम रेजिमेंट, जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट, रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी और भैरव बटालियन शामिल थीं। उनके साथ नौसेना, वायुसेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और दिल्ली पुलिस की टुकड़ियां भी शामिल हुईं।
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