
अंकिता भंडारी मामला: सीबीआई जांच छह माह में पूरी हो, साक्ष्य मिटाने वालों पर भी हो कार्रवाई: कांग्रेस
कांग्रेस ने अनकीता भंडारी हत्या मामले की जांच सीबीआई से छह माह के भीतर पूरी कराने और अपराधियों को न्याय प्रक्रिया से दूर रखने की मांग करते हुए कहा है कि जिन लोगों ने रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर साक्ष्यों को नष्ट किया, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लाम्बा और पार्टी के संचार विभाग के सचिव विभू वालिया ने शनिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरू से ही इस मामले में पर्दाफाश करने की कोशिश की है। उनका कहना था कि जन दबाव के तहत यद्यपि विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया, लेकिन जांच के दौरान जिन वीआईपी के नाम सामने आए, उनसे पूछताछ तक नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जिस रिसॉर्ट में यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, वह भाजपा के एक मंत्री का था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में कोई रुचि नहीं दिखाई, जबकि उन्हें इस पर माफी मांगनी चाहिए थी।
हत्या की घटना का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बेटी अनकीता भंडारी भाजपा नेता विनोद आर्य के रिसॉर्ट में काम करती थी। नौकरी को एक महीना भी नहीं हुआ था कि पिछले साल 18 सितंबर को उन पर वीआईपी मेहमानों को अनैतिक सेवाएं प्रदान करने का दबाव डाला गया, लेकिन अनकीता ने इनकार कर दिया। इसके बाद अनकीता की हत्या कर दी गई और उनका शव नहर में फेंक दिया गया।
उन्होंने कहा कि 19 से 22 सितंबर तक केवल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई और 23 सितंबर को स्थानीय भाजपा विधायक रेनू बिष्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रिसॉर्ट पर बुलडोजर चला दिया। इस कार्रवाई का स्पष्ट उद्देश्य रिसॉर्ट से सभी साक्ष्य मिटाना था, क्योंकि अनकीता वहीं रहती थी। फिर 24 सितंबर को अनकीता का शव नहर से बरामद हुआ, जिसके बाद उनके माता-पिता ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। मामला बढ़ने पर भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद जनता सड़कों पर उतर आई तो मुख्यमंत्री ने दबाव में आकर अक्टूबर 2022 में एसआईटी का गठन किया। इस मामले में तीन अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा हुई, लेकिन अनकीता पर दबाव डालने वाला वीआईपी कौन था, इसका अब तक खुलासा नहीं हो पाया है।
श्रीमती लाम्बा ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि यदि वे एक ही दिन में नोटबंदी का एलान कर सकते हैं तो तीन साल से अनकीता को न्याय दिलाने में दिक्कत क्यों आ रही है, जबकि अनकीता के पिता भाजपा नेताओं अजय कुमार और दुष्यंत कुमार के नाम लगातार ले रहे हैं, लेकिन एसआईटी ने उनसे पूछताछ तक नहीं की। उन्होंने रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अदालती आदेश के बिना स्थानीय भाजपा विधायक ने रिसॉर्ट पर बुलडोजर क्यों चलाया। एसआईटी की जांच में वीआईपी का नाम क्यों सामने नहीं आया और यदि आरोप गलत थे तो उनका खंडन क्यों नहीं किया गया। उनका कहना था कि भाजपा नेताओं के नाम आने पर केवल पार्टी से निष्कासन पर्याप्त नहीं था और यदि मंत्री के बेटे का नाम आया था तो प्रधानमंत्री को माफी मांगनी चाहिए थी।
उन्होंने वीआईपी एंगल की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि साक्ष्यों को मिटाने और बुलडोजर चलाने का आदेश देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही महिलाओं के काम के स्थानों पर सुरक्षा से संबंधित कानूनों पर सख्ती से अमल, राजनीतिक सरपरस्ती प्रदान करने वालों की जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक स्वतंत्र अनुसंधान प्रणाली स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मामले में सीबीआई बिना किसी दबाव के निष्पक्षता के साथ छह माह में मामले को नतीजे तक पहुंचाए, और भाजपा के लोग नैतिक व्यवहार अपनाते हुए इस मामले से जुड़े अपराधियों को न्याय प्रक्रिया से दूर रखें, ताकि न्यायपूर्ण कार्रवाई हो सके और अनकीता भंडारी को न्याय मिल सके।
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