गुजरात भारतीय मुजाहिदीन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मोहम्मद तनवीर की फांसी की सज़ा पर रोक लगाई
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गुजरात इंडियन मुजाहिदीन मामले में ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट से फांसी की सजा पाने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति की फांसी पर आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक (स्टे) लगा दी। ज़ारीज़ रिलीज़ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने आज आरोपी मोहम्मद तनवीर, जो गुजरात के शहर सूरत से संबंधित है, की याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया। आरोपी तनवीर अहमद के मामले की पैरवी जमात उलेमा महाराष्ट्र (अर्शद मदनी) की कानूनी सहायता समिति कर रही है।
आज सुनवाई के दौरान तीन सदस्यीय पीठ के न्यायाधीश विक्रम नाथ, न्यायाधीश संधीप मेहता और न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह को वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामा कृष्णन ने बताया कि आरोपी मोहम्मद तनवीर को गुजरात हाई कोर्ट ने फांसी की सजा दी है, जबकि यह भी आरोप नहीं है कि उसने बम धमाके किए थे या वह बम धमाकों के समय अहमदाबाद में मौजूद था।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि गुजरात हाई कोर्ट का फैसला कानूनी रूप से सही नहीं है, आरोपी पिछले अठारह वर्षों से जेल में बंद है। वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामा कृष्णन ने अदालत को आगे बताया कि गुजरात हाई कोर्ट ने कानूनी रूप से अत्यंत कमजोर सबूतों और संकेतों के आधार पर आरोपी को फांसी की सजा दी है, जिस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
तीन सदस्यीय पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामा कृष्णन के तर्कों की सुनवाई के बाद गुजरात सरकार को नोटिस जारी करते हुए सेशन कोर्ट और हाई कोर्ट की रिकॉर्ड मांगी। वरिष्ठ अधिवक्ता की याचिका पर अदालत ने पक्षकारों को अदालती रिकॉर्ड के अनुवाद भी उपलब्ध कराने का आदेश दिया। आज सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामा कृष्णन की सहायता अधिवक्ता शाहिद नदीम, अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड यश विजय, अधिवक्ता अशित और अन्य ने की।
आज की अदालती कार्रवाई पर जमात उलेमा महाराष्ट्र के अध्यक्ष मौलाना हलीम अल्लाह क़ासमी ने मुंबई में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि आरोपी मोहम्मद तनवीर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई संतोषजनक रही, क्योंकि अपील दायर करने के लिए दिए गए समय के भीतर अपील दायर होने के बाद अदालत ने उस पर सुनवाई कर ली, क्योंकि फांसी की सजा पर रोक (स्टे) न होने के कारण आरोपी और उसके परिवार परेशान हो रहे थे। उन्होंने कहा कि गुजरात हाई कोर्ट से फांसी और आजीवन कारावास की सजा पाने वाले अन्य आरोपियों, जिन्होंने जमात उलेमा कानूनी सहायता समिति से कानूनी सहायता मांगी है, की अपील्स जल्द ही दायर की जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि आजीवन कारावास की सजा पाने वाले सादिक इस्लाम शेख की अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दी गई है, जिस पर जल्द सुनवाई की उम्मीद है।
यह स्पष्ट हो कि गुजरात इंडियन मुजाहिदीन मामले में निचली अदालत ने 38 आरोपियों को फांसी, 11 आरोपियों को आजीवन कारावास और 28 आरोपियों को मामले से बरी कर दिया था। निचली अदालत से सजा पाने वाले अधिकांश आरोपियों ने जमात उलेमा कानूनी सहायता समिति और कुछ आरोपियों ने अपने आप हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर लगभग एक वर्ष तक सुनवाई चली। हाई कोर्ट ने सुनवाई पूर्ण करने के बाद फैसला सुनाते हुए निचली अदालत का फैसला वैसा ही रखा, यानी सभी आरोपियों की सजाएं बरकरार रहीं।