हाथरस की घटना की दोबारा जांच होनी चाहिए: अखिलेश यादव
Awaz E Bihar••10 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर महिलाओं के शोषण के मामलों पर चुप्पी साधे रखने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस सामूहिक बलात्कार मामले पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री में कई तथ्य और सबूत सामने आए हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, इसलिए पूरे मामले की दोबारा जांच कराई जानी चाहिए।
महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लाम्बा ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हाथरस में 14 सितंबर 2020 को एक दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना हुई थी और 29 सितंबर को उसकी मौत हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 30 सितंबर की आधी रात को पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन ने पीड़ित परिवार की एक नहीं सुनी और परिवार के सदस्यों को कथित तौर पर घर में कैद कर दिया गया और बेटी का चेहरा तक नहीं देखने दिया गया।
श्रीमती लाम्बा ने आरोप लगाया कि उस समय लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को पीड़ित परिवार से मिलने से रोका गया था। उनका कहना था कि अगर उस समय परिवार तक पहुंचने दिया गया होता तो न्याय की प्रक्रिया अलग हो सकती थी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि हाथरस मामले पर आधारित डॉक्यूमेंट्री में शामिल एक महिला रोग विशेषज्ञ ने दावा किया है कि पीड़िता को अस्पताल लाने से पहले सबूत मिटा दिए गए थे और उसे नहलाया और साफ किया गया था।
उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में यह भी सामने आया है कि पीड़ित लड़की की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और उसे घसीटा गया था, लेकिन उसे एम्बुलेंस और स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका दावा था कि पीड़िता ने मौत से पहले अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी थी, लेकिन उसके बयान को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
श्रीमती लाम्बा ने कहा कि हाथरस जैसे गंभीर मामले में पुलिस के रवैये पर सवाल उठे हैं और अगर समय पर सबूत इकट्ठे किए गए होते और महत्वपूर्ण सबूत अदालत में पेश किए गए होते तो दोषियों को सजा मिल सकती थी। उन्होंने सवाल किया कि डॉक्यूमेंट्री में सामने आए तथ्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि दो मार्च 2023 को अदालत ने इस मामले के चार आरोपियों में से तीन को बरी कर दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि मामले की जांच कमजोर की गई, जिससे न्याय प्रभावित हुआ।