ईरान पर यूरोपीय रुख सख्त, समझौता केवल न्यूक्लियर और मिसाइल सीमाओं पर संभव
Awaz E Bihar••3 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
वाशिंगटन : पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के समापन के लिए मध्यस्थता करने का प्रयास कर रहा है, इस बीच यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शांति समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलों के मुद्दे को शामिल करना आवश्यक होगा।
यूरोपीय संसद से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ इस युद्ध के स्थायी समापन की इच्छा रखता है, हालांकि उनके अनुसार संकट का समाधान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात की स्वतंत्रता की बहाली से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के प्रभाव यूरोप की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। उनका कहना था कि ईरान का युद्ध यूरोप से दूर नहीं है, बल्कि सीधे यूरोपीय नागरिकों के जीवन और सुरक्षा पर प्रभाव डाल रहा है।
वॉन डेर लेयेन ने आगे बताया कि युद्ध के कारण यूरोप को ऊर्जा आयात पर अतिरिक्त 27 अरब यूरो के खर्च का सामना करना पड़ा है।
इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि ईरान और लेबनान में युद्धविराम को कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी अरब देशों के साथ सहयोग इस संकट पर काबू पाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
ये बयान ऐसे समय में सामने आए हैं, जब ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में जारी वार्ता में यूरोपीय देश सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं।
हालांकि यूरोपीय अधिकारियों ने इस चिंता का इज़हार किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ ऐसा समझौता कर सकते हैं, जिसके दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
यूरोपीय अधिकारी पहले भी इस बात पर जोर देते रहे हैं कि किसी भी संभावित समझौते में ईरान का परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलों का मुद्दा शामिल होना चाहिए, ताकि भविष्य में नए संकट पैदा न हों, जैसा कि रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया है।
याद रहे कि अप्रैल 2026 की शुरुआत में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता का पहला दौर हुआ था, हालांकि वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका।
इसी दौरान ट्रम्प ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जारेड कुशनर को इस्लामाबाद जाने से रोक दिया था, जहां ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से मुलाकात की संभावना थी, जो कथित तौर पर एक नया ईरानी समाधान पेश करने आए थे। हालांकि अमेरिकी सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए स्वीकार्य नहीं था।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई ईरान के "शेडो बैंकिंग नेटवर्क" को लक्षित करने के लिए की गई है, जिसके माध्यम से अरबों डॉलर के वित्तीय लेनदेन किए जा रहे थे।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के एक उप-विभाग (ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल) ओएफएसी ने अपने बयान में कहा है कि इन व्यक्तियों और कंपनियों ने ईरान को प्रतिबंधों से बचने और कथित तौर पर आतंकवाद के वित्तपोषण में सुविधा प्रदान की। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कई अरब डॉलर का अस्पष्ट लेनदेन किया गया जो वैश्विक प्रतिबंधों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कोई भी कंपनी अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरानी सरकार या पासدارान انقلاب (आईआरजीसी) को "टोल टैक्स" या शुल्क का भुगतान करती है तो उसके खिलाफ भी सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
याद रहे कि इससे पहले 16 अप्रैल को भी अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरान के 12 प्रमुख व्यक्तियों, कई कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए थे। प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले व्यक्ति और कंपनियां मोहम्मद हुसैन शमखानी के लिए काम कर रहे थे।
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इसकी वित्तीय गतिविधियों को सीमित करना और क्षेत्र में इसके प्रभाव को कम करना है।