ईरान ने जहाजों पर कब्जा करके होरमुज़ का मालिक होने के दावे पर मुहर लगा दी
Awaz E Bihar••8 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने होरमुज़ जलडमरूमध्य को फिर से वैश्विक ध्यान का केंद्र बना दिया है, जहां हाल के दिनों में जहाजों की जब्ती और हमलों ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। अल जज़ीरा के अनुसार, ईरान ने 22 अप्रैल को 2 विदेशी कंटेनर जहाजों को जब्त कर लिया था, जबकि एक अन्य जहाज पर गोलीबारी की गई थी, इससे पहले अमेरिका ने भी एक ईरानी जहाज को रोककर जब्त कर लिया था, जिसे ईरान ने 'समुद्री डाका' करार दिया था। अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि होरमुज़ जलडमरूमध्य अब वास्तविक रूप से दोनों देशों के नियंत्रण में आ गया है, लेकिन ईरान इसके ऊपर प्रभावी ढंग से नियंत्रण रखता है, ईरान ने मार्च की शुरुआत में इस जलमार्ग पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि केवल उसकी अनुमति से ही होरमुज़ जलडमरूमध्य से जहाज गुजर सकते हैं। ईरान की ओर से होरमुज़ जलडमरूमध्य से टोल टैक्स की पहली राशि वसूलने की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में ईरान ने केवल 'दुश्मन देशों के जहाजों' पर प्रतिबंध लगाया था, हालांकि अमेरिका की ओर से 13 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी के बाद ईरान ने सभी विदेशी जहाजों पर सख्ती बढ़ा दी है। अमेरिका का दावा है कि उसने अब तक 31 ईरानी या ईरान से जुड़े जहाजों को मार्ग बदलने पर मजबूर किया है, जबकि दूसरी ओर ईरान ने यह रुख अपनाया है कि जब तक उसके तेल निर्यात पर प्रतिबंध नहीं हट जाते, होरमुज़ जलडमरूमध्य में स्वतंत्र रूप से आवाजाही संभव नहीं है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट में प्रकाशित विशेषज्ञों की राय के अनुसार, दोनों देशों के बीच यह स्थिति 'प्रतिक्रिया की कार्रवाई' का सिलसिला बन गई है, जिसमें हर कदम और अधिक टकराव का खतरा बढ़ा रहा है, किसी भी समय यह तनाव बड़े संकट में बदल सकता है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि हाल के विवाद के बावजूद ईरान के तेल निर्यात में वृद्धि हुई है और पिछले 1 महीने में इसे लगभग 4.97 अरब डॉलर की आय हुई है, जो युद्ध से पहले की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान स्थिति एक 'खतरनाक खेल' की तरह है, जहां दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और यही तरीका वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।