’बेहतर होगा ईरान आत्मसमर्पण कर दे‘, ट्रंप के ताज़ा बयानों ने चिंता में क्या बढ़ोतरी की, 10 पॉइंट्स में समझें विस्तार
Awaz E Bihar••0 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए जा रहे लगातार हमलों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ईरान भी अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है और विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी जा रही हैं। कई मिसाइलों ने विनाश भी किया है और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में हताहतों और नुकसान की खबरें भी सामने आ रही हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने ताज़ा बयान में ईरान को एक बार फिर चेतावनी दी है और कहा है कि वह जल्द से जल्द आत्मसमर्पण कर दे, अन्यथा अमेरिकी सेना ईरान की जमीन पर भी उतारी जाएगी। ट्रम्प के बयानों ने वैश्विक स्तर पर चिंता में और वृद्धि कर दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि "हमने ईरान पर ऐसा हमला किया है जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा। हज़ारों लोगों का खून बहाने वाला ख़ामेनेई अब मर चुका है। इस मौत पर ईरान के लोगों ने जश्न मनाया। जब तक हम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते, हमला करते रहेंगे।" 'न्यूयॉर्क पोस्ट' से बातचीत में ट्रम्प ने सख्त लहजे में कहा कि "अगर ज़रूरत पड़ी तो ईरान में ज़मीनी सेना भेजने में मुझे कोई हिचकिचाहट नहीं होगी। ईरान में बड़े हमलों की एक लहर जल्द आने वाली है।" ट्रम्प ने यह भी कहा कि "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी तेहरान के दर्जनों उच्च अधिकारियों को मारकर निर्धारित समय से बहुत आगे चल रहा है। हर राष्ट्रपति कहता है कि ज़मीन पर सेना नहीं भेजेंगे, लेकिन मैं ऐसा नहीं कहता हूं।" ट्रम्प का कहना है कि "इज़राइल की स्थिति पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है। अमेरिका एक बार फिर दुनिया का सबसे अमीर और शक्तिशाली देश बन गया है। यह सब हमारे उन योद्धाओं की वजह से हुआ है जो युद्ध में अपनी जान तक क़ुर्बान करने के लिए तैयार रहते हैं।" ट्रम्प ने कहा कि "ईरान के पास लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं। अगर उसके पास परमाणु अस्त्र होगा तो यह अमेरिकियों के लिए गंभीर खतरा होगा। हम ऐसे देश को परमाणु अस्त्र रखने की अनुमति नहीं दे सकते जो आतंकवादी तैयार करता है। ऐसा अस्त्र रखने से उन्हें दुनिया से जबरन वसूली करने की ताकत मिल जाएगी।" ट्रम्प का यह भी कहना है कि "अमेरिका ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चला रहा है। मैंने हमला करने से पहले ईरान को समझाया था, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी। हम ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करेंगे।" ट्रम्प के अनुसार "हमला करने का यह अच्छा समय था। ईरान लगातार झूठ बोल रहा है। उसके खिलाफ एक लंबा अभियान चलाएंगे, जिसे दुनिया देखती रह जाएगी। बेहतर होगा कि ईरान आत्मसमर्पण कर दे।" ट्रम्प ने कहा कि "लगभग 47 वर्षों से यह (ईरानी) सरकार अमेरिका पर हमले कर रही है और अमेरिकियों को मार रही है। जनरल कासिम सुलेमानी को मैंने अपने पहले कार्यकाल में ही मार गिराया था। अब हम ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट कर रहे हैं। दूसरी बात, हम उनकी नौसेना को पूरी तरह से नष्ट कर रहे हैं। हम पहले ही उनके 10 जहाज़ नष्ट कर चुके हैं। तीसरी बात, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दुनिया का नंबर 1 आतंकवादी सरपरस्त कभी भी परमाणु अस्त्र हासिल न कर सके। मैंने शुरू से ही कहा था कि उनके पास कभी परमाणु अस्त्र नहीं होंगे।" डोनाल्ड ट्रम्प ने यह भी कहा कि "ईरानी सरकार का पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम तेज़ी से बढ़ रहा था। इससे अमेरिका और विदेशों में तैनात हमारी सेनाओं के लिए एक बहुत बड़ा और स्पष्ट खतरा पैदा हो गया था। ईरान के पास पहले ही ऐसी मिसाइलें थीं जो यूरोप और हमारे स्थानीय और विदेशी ठिकानों पर हमला करने की क्षमता रखती थीं। जल्द ही वे अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रखने वाली मिसाइलें भी बना लेते।" ट्रम्प का कहना है कि "अगर ईरान के पास लंबी दूरी की मिसाइलें और परमाणु अस्त्र आ जाते तो यह केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि अमेरिका के लिए भी खतरा होता। मुझे पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में किए गए ईरान परमाणु समझौते को रद्द करने पर बहुत गर्व है।"