संसद में कांग्रेस सीमा संशोधन विधेयक का करेगी विरोध; चंदा चोरी, पेपर लीक और महंगाई पर सरकार को घेरेगी
Awaz E Bihar••3 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र में सीमा संशोधन विधेयक आने पर इसका विरोध करने के साथ ही चंदा चोरी, पेपर लीक और महंगाई समेत विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने का फैसला किया है। संसद के मानसून सत्र से पहले पार्टी के संसदीय रणनीति समूह की गुरुवार को यहां हुई महत्वपूर्ण बैठक में सत्र के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के बाद कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बैठक लगभग डेढ़ घंटे चली और पार्टी की संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने इसकी अध्यक्षता की। श्रीमती गांधी के निवास पर हुई इस बैठक में चर्चा के दौरान पार्टी की रणनीति पर विस्तार से विचार किया गया। उनका कहना था कि सोमवार से मानसून सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन सरकार ने अभी तक सत्र में लाए जाने वाले विधेयकों की आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्र शुरू होने से एक दिन पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक होगी जिसमें सरकार प्रस्तावित विधेयकों के बारे में जानकारी प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सीमा संशोधन विधेयक और इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को फिर से लाने की कोशिश कर सकती है, जिसका पार्टी मजबूती से विरोध करेगी। उनका यह भी कहना था कि अगर सरकार मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर महिलाओं का आरक्षण लागू करके 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करती है तो कांग्रेस इसका समर्थन करेगी, लेकिन महिला आरक्षण के नाम पर सीमा संशोधन की कोशिश स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान की भावना के विपरीत दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन कांग्रेस इस मामले में अन्य विपक्षी दलों के साथ लगातार संपर्क में है और उसे विश्वास है कि सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी। उनका कहना था कि अगर सरकार इसमें सफल भी होती है तो वह दागदार बहुमत होगी। श्री रमेश ने कहा कि कांग्रेस विकस्त भारत शिक्षा फाउंडेशन विधेयक, विदेशी दान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में की जाने वाली संभावित संशोधनों समेत जनविरोधी विधेयकों का भी विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी इन प्रस्तावों के पक्ष में नहीं है और संसद में उनका विरोध करेगी। इसके अलावा कांग्रेस मानसून सत्र में अयोध्या राम मंदिर में 'चंदा चोरी' और आस्था के साथ धोखा, परीक्षा और शिक्षा प्रणाली विशेष रूप से नेट और अन्य पेपर लीक के मामले, ई-20, कमजोर पड़ती विदेश नीति, महंगाई और अन्य जन समस्याओं पर सरकार को घेरेगी और उन पर चर्चा की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र 19 दिन का है। इसके दौरान कई विधेयक पारित होने हैं और विपक्ष चाहता है कि उसके उठाए गए मुद्दों पर भी चर्चा हो। उनका आरोप था कि मोदी सरकार सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन सत्र के दौरान उन पर चर्चा नहीं होती और केवल विधेयक पारित कराए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के शब्दों और कर्मों में जमीन और आसमान का अंतर है। एक देश-एक चुनाव के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में श्री रमेश ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को 10 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट के संबंध में कई तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन कांग्रेस इस सिद्धांत के भी खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस संबंध में चार पृष्ठों का पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं क्योंकि यह संविधान की भावना और लोकतांत्रिक प्रणाली के विपरीत है। इसके先े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि अयोध्या में 'चंदा चोरी-आस्था के साथ धोखा', पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली का संगठित पतन, संस्थानों पर कब्जा, राजनीतिक दलों को तोड़ने की राजनीति, कई घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप, महंगाई, विदेश नीति की विफलताएं और रणनीतिक गलतियां, साढ़े तीन करोड़ गाड़ियों के मालिकों पर ई-20 थोपा, बेलगाम वनों की कटाई और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हो रहे हमलों जैसे मुद्दों पर कांग्रेस आगामी मानसून सत्र के दौरान मोदी सरकार को जवाबदेह ठहराएगी। उन्होंने कहा कि इन सभी विषयों पर कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई है।