राहुल गांधी की अनियंत्रितता, बेअदबी और बदसलूकी की भेंट चढ़ा संसद का मानसून सत्र: भाजपा
Awaz E Bihar••26 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अनुचित बताते हुए कहा है कि संसद का मानसून सत्र एक नेता की अनुशासनहीनता, असंयम और बदतमीजी की भेंट चढ़ गया है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री गांधी को अनुचित, असंजीदा और स्वार्थी बताते हुए कहा कि उनमें राजनीतिक शिष्टता की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि श्री गांधी बिना किसी अनुमति के अपनी बहन के साथ प्रधानमंत्री के आवास के गेट पर बैठ गए। वे कोई आम आदमी नहीं हैं, उनके पिता प्रधानमंत्री थे, उनकी दादी और परदादा भी प्रधानमंत्री थे। उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री के आवास के लिए सुरक्षा के कितने सख्त इंतजाम होते हैं। जब गृह सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री जितेंद्र सिंह वहां गए, तो उन्होंने कहा कि वे चर्चा और बहस के लिए तैयार हैं। श्री प्रसाद ने कहा, जब उन्होंने (श्री सिंह) कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, तो श्री गांधी ने कहा कि उन्हें मंत्री का इस्तीफा चाहिए। श्री गांधी! देश और संसद की राजनीति आपकी अनुशासनहीनता, विशेषाधिकार और स्वयं के निर्णय के दबाव में नहीं चलेगी। भाजपा नेता ने कहा कि लोकतंत्र इस तरह नहीं चलता और शायद यही आपकी पार्टी की वर्तमान स्थिति का कारण भी है। श्री गांधी अपनी गलतियों से सीखते नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने मांग की कि दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री जवाब दें। इस मांग पर उन्होंने सदन को चलने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कल गृह मंत्री अमित शाह ने मीडिया के सामने कहा कि मैं 24 घंटे तक पूरी चर्चा सुनने और उनके सभी तर्कों का बिंदु-दर-बिंदु जवाब देने के लिए तैयार हूं। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बिजनेस एडवाइजरी कमिटी (बीएसी) और सदन में यह मामला उठाया और कहा, हम चर्चा के लिए तैयार हैं। सब कुछ इसी तरह चल रहा था कि तभी उन्होंने (श्री गांधी) ने अपनी मांग बदल दी और कहा कि हमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए। यह सिलसिला चलता रहा, और इसे ही मुद्दा बनाया गया। भाजपा नेता ने कहा कि इसके बाद श्री प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा दे दिया। जब चर्चा की बात आई, तो श्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने दो बड़े कदम उठाए। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) पर एक बहुत सख्त कानून लाया गया, फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की गई और सजा के साथ-साथ पेपर लीक गैंग से निपटने के लिए भी कार्रवाई की गई। इसके बाद, परीक्षा और नीट में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई। उन्होंने कहा, "हमने साफ कर दिया है कि कोई गोली नहीं चलाई गई। अगर उन्होंने संसद में श्री शाह की बात सुनी होती, तो उन्हें अपने सवालों के जवाब मिल जाते, लेकिन उन्होंने सदन को चलने ही नहीं दिया। तब उनकी (श्री गांधी) दो बेवकूफी भरी बातें सामने आईं। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने (गृह मंत्री ने) गोली चलाने का आदेश दिया है, तो वे इस्तीफा दें और अगर नहीं दिया है, तो वे नाकाबिल मंत्री हैं, तब इस्तीफा दें।" उन्होंने कहा कि श्री गांधी को सरकार चलाने की मूल बातें भी नहीं पता हैं। श्री प्रसाद ने कहा कि श्री शाह 24 घंटे सदन में बैठने को तैयार थे, फिर भी श्री गांधी ने कहा कि नहीं, हमें उनका इस्तीफा चाहिए, उनकी चर्चा सुनकर क्या फायदा? श्री गांधी की अनुशासनहीनता से देश की राजनीति नहीं चलेगी।