सोमनाथ मंदिर हिंदुस्तान के अटूट आस्था का प्रतीक: मोदी
Awaz E Bihar••21 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' के अवसर पर कहा कि यह अटूट आस्था, आध्यात्मिकता और भारत की सनातन आत्मा का पवित्र प्रतीक है, जो आने वाले एक हजार वर्षों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। श्री मोदी ने कहा कि 75 वर्ष पूर्व इसी दिन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कोई साधारण अवसर नहीं था, बल्कि सोमनाथ के 'पुनः प्रतिष्ठा' ने भारत के स्वतंत्र चेतना की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय इतिहास की एक और महत्वपूर्ण घटना अर्थात 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमताओं का प्रदर्शन और अटूट राजनीतिक संकल्प का प्रमाण था। उन्होंने विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता पर जोर दिया और विभाजनकारी सोच के खिलाफ सावधान रहने की अपील की। श्री मोदी ने इस समारोह को केवल एक औपचारिक समारोह नहीं बल्कि भारत के सनातन चेतना और सांस्कृतिक स्थिरता की घोषणा बताया। वर्ष 1951 में सोमनाथ मंदिर की पुनः प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कोई साधारण अवसर नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, तो 1951 में सोमनाथ की पुनः प्रतिष्ठा ने भारत के स्वतंत्र चेतना की घोषणा की। स्वतंत्रता के केवल चार वर्ष बाद मंदिर के पुनर्निर्माण के महत्व पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जब राष्ट्र विदेशी जंजीरों से स्वतंत्र हुआ, उसी समय सोमनाथ के पुनर्निर्माण ने विश्व को यह संदेश दिया कि भारत केवल स्वतंत्र ही नहीं हुआ है, बल्कि वह अपनी प्राचीन महानता को पुनः प्राप्त कर रहा है। इस अवसर के बहुमुखी महत्व को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे केवल 75 वर्षों के इतिहास को नहीं देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं यहाँ विनाश में सृजन का वह संकल्प देख रहा हूँ, जिसे सोमनाथ ने पूरा किया है। उन्होंने इस पवित्र भूमि में असत्य पर सत्य की निरंतर विजय के अनुभव की बात कही। प्रधानमंत्री ने भविष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत की याद मनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल अतीत का उत्सव नहीं बल्कि आने वाले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा भी है। उन्होंने इस दिन को राष्ट्रीय इतिहास की एक और महत्वपूर्ण घटना से भी जोड़ा और कहा कि 1998 में आज ही के दिन किए गए पोखरण परमाणु परीक्षणों की वर्षगांठ भी है। उन्होंने कहा कि भारत ने 11 मई को तीन परमाणु परीक्षण कर भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमताओं का प्रदर्शन किया था। इसके दो दिन बाद 13 मई को किए गए अतिरिक्त परीक्षणों को उन्होंने भारत के अटूट राजनीतिक संकल्प का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उस समय पूरे विश्व का दबाव भारत पर था, लेकिन अटल जी के नेतृत्व में उस समय की सरकार ने दिखा दिया कि हमारे लिए राष्ट्र सबसे पहले है, विश्व की कोई शक्ति भारत को झुका नहीं सकती और न ही दबाव में ला सकती है। इस अभियान के नाम के महत्व को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षण को 'ऑपरेशन शक्ति' का नाम गहरे सांस्कृतिक कारणों से दिया गया था। उन्होंने कहा कि शिव और शक्ति की संयुक्त पूजा का दर्शन अब भारत की वैज्ञानिक प्रगति को भी प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज हम इस संकल्प को साकार होते देख रहे हैं कि हमारी शिव और शक्ति की पूजा देश की वैज्ञानिक प्रगति की प्रेरणा भी बने। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के एक हजार वर्षों के विनाश और पुनर्निर्माण के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि महमूद गजनवी और अलाउद्दीन خلजी जैसे आक्रमणकारियों के निरंतर हमलों के बावजूद राजा भोज, भीम देव प्रथम, कुमार पाल, महीपाल प्रथम और राव खंगार जैसे मुक्तिदाता शासकों ने बार-बार मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इसे विनाश किया, उन्होंने केवल पत्थरों और गारे को देखा, लेकिन वे भारतीय संस्कृति की बौद्धिक और आध्यात्मिक शक्ति को कभी नहीं समझ पाए। आधुनिक सोमनाथ के पुनर्निर्माण में योगदान देने वाली व्यक्तियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी याद हमें प्रेरित करती है कि हमें न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है, बल्कि यह जिम्मेदारी आने वाली पीढ़ियों को भी सौंपनी है।