स्वपन दासगुप्ता के निधन के बाद सुवेंदु अधिकारी बने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ा, जब पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार सत्ता में आई और सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कोलकाता में आयोजित एक भव्य समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने सुवेंदु अधिकारी और उनके साथ 5 अन्य मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ जिन नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, उनमें दिलीप घोष, अग्निमित्र पाल, अशोक कीर्तिनिया, क्षुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक शामिल हैं। बीजेपी की इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही राज्य में पहली बार किसी दक्षिणपंथी पार्टी की सरकार बनी है। 8 मई को बीजेपी विधायक दल ने सुवेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुना था। इसके बाद उनका मुख्यमंत्री बनना तय हो गया था। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करते हुए राज्य के शासन पर कब्जा जमाया। सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर 3 दशक से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने 1995 में कांथी म्यूनिसिपैलिटी से काउंसलर के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद वे 3 बार काउंसलर रहे और कांथी म्यूनिसिपैलिटी के चेयरमैन भी बने। उन्हें 20 वर्ष से अधिक का संसदीय अनुभव प्राप्त है। वे 2 बार लोकसभा के सांसद, 3 बार विधायक और 5 वर्ष तक विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। राज्य सरकार में रहते हुए उन्होंने परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले। इसके अलावा वे 'हुगली रिवर ब्रिज कमीशन' के अध्यक्ष भी रहे। 'हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटी' के प्रमुख के रूप में उन्होंने औद्योगिक शहर हल्दिया के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहकारी आंदोलन में भी उनका बड़ा योगदान रहा है। वे एग्रीकल्चर रूरल बैंक, कांथी अर्बन को-ऑपरेटिव और विद्यासागर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। यह स्पष्ट है कि 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के जिला पूर्वी मिदनापुर के गांव किरकोली में जन्मे सुवेंदु अधिकारी ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एमए की शिक्षा प्राप्त की है। वे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री शशीर अधिकारी के पुत्र हैं और वर्तमान में अविवाहित हैं। सुवेंदु अधिकारी 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे, जिसने 34 वर्ष पुराने वामपंथी शासन को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस में रहे और 2020 तक ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री भी रहे। दिसंबर 2020 में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में बीजेपी का दामन थामा था। यह उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 207 सीटें हासिल करके सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई है। इसके साथ ही बीजेपी ने 15 वर्ष से सत्ता में काबिज ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सत्ता से बाहर कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस इस चुनाव में केवल 80 सीटें ही हासिल कर पाई है।