अमेरिका ईरान के परमाणु सामग्री पर कब्जे के लिए विशेष सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है, रिपोर्ट
Awaz E Bihar••11 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित राजनयिक प्रयास विफल हो जाते हैं, तो अमेरिका ईरान की सुरक्षित परमाणु सुविधाओं में मौजूद समृद्ध यूरेनियम के भंडार पर कब्जा करने के लिए बड़े पैमाने पर विशेष सैन्य अभियान के संभावना पर विचार कर रहा है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विशेष अभियान बल एक संभावित अभियान की योजना बना रहे हैं, जिसे कुछ विशेषज्ञों ने सैन्य दृष्टिकोण से इतिहास के सबसे जटिल मिशनों में से एक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई के लिए ईरान के भीतर व्यापक लॉजिस्टिक व्यवस्था और सख्त सुरक्षा सहयोग की आवश्यकता होगी। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के उप निदेशक जोसफ रोगर्स के अनुसार, ईरान के वर्तमान परमाणु सामग्री को अपने नियंत्रण में लेने के लिए सैन्य विकल्प सबसे प्रभावी तरीका साबित हो सकता है, क्योंकि राजनयिक वार्ता में पर्याप्त प्रगति नहीं हो रही है।
रिपोर्ट में फौजी योजना से वाकिफ एक स्रोत के हवाले से बताया गया है कि इस योजना के तहत परमाणु सुविधाओं के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाने, बाधाओं और विस्फोटक सामग्री को हटाने और सुरक्षित मार्ग बनाने के लिए हजारों सैनिकों की तैनाती आवश्यक हो सकती है। इसके बाद विशेष बलों की सीमित संख्या समृद्ध यूरेनियम तक पहुंच प्राप्त करके इसे ईरान से बाहर ले जाने की जिम्मेदारी संभालेगी। रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई में अमेरिकी नौसेना की सील टीम 6, रेंजर्स की दूसरी बटालियन और खतरनाक सामग्री और विस्फोटक वस्तुओं से निपटने वाली 21वीं कंपनी भी शामिल हो सकती है, जिसे समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने 2025 में अनुमान लगाया था कि ईरान के पास 20,000 पाउंड से अधिक समृद्ध यूरेनियम है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी ऐसे अभियान की सफलता के लिए परमाणु सुविधाओं के चारों ओर मजबूत सुरक्षा घेरा, जमीनी और हवाई निकासी के सुरक्षित मार्ग और संभावित ईरानी हमलों का प्रभावी जवाब देना आवश्यक होगा। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में ईरान से संबंधित मामलों के पूर्व निदेशक रिचर्ड गोल्डबर्ग ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि अमेरिकी सेना सुरक्षित निकासी पूरी होने तक अपनी स्थिति बनाए रख सके। उनके अनुसार, खुफिया जानकारी से पता चलता है कि ईरान ने इस्फहान की परमाणु सुविधा के आसपास रक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है, अतिरिक्त बल तैनात किए हैं और कुछ स्थानों पर विस्फोटक सामग्री भी लगाई है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने इस्फहान की सुविधा की सुरंगों में बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं, जबकि नतांज़ के पास स्थित जेबल बीकिक्स को भी संभावित लक्ष्य के रूप में पहचाना गया है, जहां हाल के दिनों में सैकड़ों सेंट्री फोर्सेज़ तैनात किए जाने की खबरें सामने आई हैं। रिचर्ड गोल्डबर्ग के अनुसार, यदि हवाई हमलों से इस सुविधा को नष्ट करना संभव नहीं है, तो विशेष सैन्य कार्रवाई के माध्यम से इसे अक्षम बनाने का विकल्प चुना जा सकता है। उनका कहना था कि ऐसे किसी भी अभियान की सफलता सुविधा के डिजाइन और इसकी कमजोरियों से संबंधित सटीक खुफिया जानकारी पर निर्भर करेगी। अमेरिकी रक्षा विभाग और व्हाइट हाउस ने अभी तक ऐसी किसी भी योजना की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है, जबकि रिपोर्ट में शामिल जानकारी जानकार सूत्रों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है।