विशेष भूमि सर्वे की धीमी गति पर सरकार ने सख्ती की, 15 दिवसीय विशेष योजना तैयार करने का निर्देश दिया
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पटना: बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण की धीमी गति पर भूमि और भूमि सुधार विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जैसवाल ने मंगलवार को अपने कार्यालय में सभी नोडल अधिकारियों के साथ सर्वेक्षण कार्य की साप्ताहिक प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कम प्रगति वाले जिलों और उनके संबंधित सर्कलों की पहचान कर उन्हें अलग से समीक्षा करने और अगले 15 दिनों के लिए विशेष कार्रवाई योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि विशेष भूमि सर्वेक्षण केवल जमीन की माप का प्रक्रिया नहीं है, बल्कि किसानों के अधिकारों की सुरक्षा और सही व प्रामाणिक भूमि रिकॉर्ड तैयार करने की एक महत्वपूर्ण अभियान है। इसलिए निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के साथ-साथ रिकॉर्ड की सटीकता, पारदर्शिता और समय पर पूर्ति को भी सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लगातार निरंतर खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि हर मंगलवार को सभी जिलों की मौजावार प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। स्वयं घोषणा, घर-घर सर्वेक्षण, नक्शा बनाना, प्रारूप प्रकाशन, दावे और आपत्तियां और अंतिम प्रकाशन के चरण में लंबित कार्यों के लिए स्पष्ट समय सीमा तय कर उन्हें निर्धारित समय में पूरा किया जाए।
मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों के फील्ड में उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजा स्तर पर नियमित रूप से कैंप लगाए जाएं और किसानों के सामने आने वाले मुद्दों का तुरंत निवारण किया जाए, ताकि सर्वेक्षण की प्रक्रिया में आम लोगों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े।
लंबित दावे और आपत्तियां प्राथमिकता के आधार पर निपटाई जाएंगी
समीक्षा बैठक के दौरान विभाग के सचिव जे सिंह ने सभी जिलों में सर्वेक्षण की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने लंबित दावों और आपत्तियों की अधिकारीवार सूची तैयार करने और पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए।
सचिव ने कहा कि सर्वेक्षण के हर चरण की प्रगति पर निरंतर निगरानी रखना आवश्यक है। तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर किया जाए और डैशबोर्ड के माध्यम से साप्ताहिक निगरानी की जाए। डैशबोर्ड पर जिला और सर्कलवार लक्ष्य, उपलब्धियां, लंबित मामले और विलंब के कारणों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध रहनी चाहिए, ताकि जहां भी कार्य की गति कम हो, वहां तुरंत सुधार कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण की गति बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता पर किसी भी हालत में समझौता नहीं किया जाएगा। सटीक, पारदर्शी और ताजा भूमि रिकॉर्ड तैयार करना ही इस विशेष अभियान का मूल उद्देश्य है।
बैठक में डायरेक्टोरेट ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स एंड सर्वे के सहायक निदेशक सुबोध कुमार सहित सभी जिलों के नोडल अधिकारी उपस्थित थे।