सामग्री पर जाएँ
राजनीति

यूरोप, अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक समझौते से दुनिया में स्थिरता आयी: मोदी

Awaze Bihar4 मिनट पढ़ें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक समझौतों से विश्व में स्थिरता आई है। उन्होंने कहा कि भारत आज तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है और कम मुद्रास्फीति के साथ तीव्र आर्थिक विकास के कारण विश्व में आशा की एक किरण बन गया है। मोदी बजट सत्र के आरंभ पर संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर दे रहे थे। चर्चा के आरंभ में कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने नारेबाजी और हंगामा किया और सदन से वॉकआउट कर गए।

अपनी सरकार के दौरान विभिन्न देशों और बाजारों के साथ हुए व्यापारिक समझौतों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि "भारत ने नौ बड़े देशों और यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ व्यापारिक समझौते किए हैं। विश्व के देश भारत से ऐसे ही सौदे नहीं करते, अगर कोई विकसित देश किसी विकासशील देश के साथ सौदा करता है तो यह बड़ी बात है।" उन्होंने कहा कि विपक्ष को जवाब देना होगा कि उन्होंने देश को किस हालत में छोड़ा था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि "पूरा विश्व इस व्यापारिक समझौते की प्रशंसा कर रहा है। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ सौदों के बाद अब वैश्विक स्तर पर स्थिरता आई है। भारत विश्व के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह तैयार है। विश्व समानता के साथ भारत को देखता है। हमारे एमएसएमई इकाइयों पर विश्व का विश्वास बढ़ रहा है। बड़े-बड़े देश भारत के साथ व्यापारिक संबंध बनाने के लिए उत्सुक हैं।"

मोदी ने कहा कि आर्थिक शक्ति हो, जनता में उत्साह हो, भारत विनिर्माण का केंद्र बने, यह वोट बैंक की राजनीति में डूबे लोगों की प्राथमिकता नहीं थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों के लाल किले से भाषणों में न तो सोच थी, न दृष्टि थी और न ही संकल्प, जिसका खमियाजा देश को लंबे समय तक भुगतना पड़ा। इससे बनी देश की छवि को साफ करने में इस सरकार को बड़ी ऊर्जा लगानी पड़ी है।

उन्होंने कहा कि "देश नीतियों के आधार पर चल रहा है जिससे विश्व का भारत पर विश्वास बढ़ा है। सरकार सुधार कर रही है, तेजी से सुधार हो रहे हैं। देश रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में देश के विकास का नक्शा बेहतर तरीके से और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है। हंगामे के दौरान मोदी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि "मेरी प्रार्थना है कि आदरणीय खड़गे जी की उम्र देखते हुए बैठकर भी नारे लगा सकते हैं, उन्हें तकलीफ नहीं होगी। उन्हें बैठकर नारे लगाने की अनुमति दे दीजिए।"

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में विकास की गूंज है। राष्ट्रपति ने युवा भारत की ताकत को, हर वर्ग की क्षमता को सदन में रखा है, भारत के भविष्य के बारे में विश्वास व्यक्त किया है। 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा समाप्त होकर दूसरा चौथाई शुरू होने वाला है, देश विकसित भारत के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ने वाला है।

मोदी ने कहा कि "हर व्यक्ति महसूस कर रहा है कि हम एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुके हैं। हमें न रुकना है न पीछे मुड़कर देखना है और लक्ष्य हासिल करने के बाद ही सांस लेना है।" उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी एक उत्कृष्ट अवसर है क्योंकि विश्व के विकसित देश बूढ़े होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व का भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा है। युवा महत्वपूर्ण क्षमता हैं, सपने भी हैं और शक्ति भी। मोदी ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में भारत की अर्थव्यवस्था छठे स्थान से फिसलकर ग्यारहवें पर पहुंच गई थी, फिर से अब हम तीसरे स्थान पर जाने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड के बाद विश्व में जो स्थिति उत्पन्न हुई है उसमें विश्व संभल नहीं पा रहा है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि विश्व एक नई वैश्विक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। निष्पक्ष विश्लेषण में झुकाव भारत की ओर है, भारत विश्व का मित्र, विश्व का भाई और विश्वसनीय साझेदार बन गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक कल्याण में उपयुक्त भूमिका निभा रहे हैं, ग्लोबल साउथ की बात हो रही है। भारत इसकी ऊंची आवाज बन गया है।

अन्य भाषा में: English · اردو

साझा करें:

संबंधित समाचार