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राजनीति

ओम बिड़ला को स्पीकर पद से हटाने का विपक्ष का प्रस्ताव लोकसभा में ध्वनिमत से खारिज

Awaze Bihar4 मिनट पढ़ें

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए लाई गई विपक्ष की प्रस्ताव बुधवार को ध्वनिमत से खारिज हो गई। कांग्रेस के डॉक्टर मोहम्मद जावेद और कुछ अन्य सदस्यों ने बजट सत्र के पहले चरण के दौरान बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया था, जो सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन 9 मार्च के एजेंडे में शामिल था, लेकिन इसे मंगलवार को पेश किया गया था। मंगलवार को पेश किए जाने के बाद इस पर दो दिन तक चर्चा हुई और सदन ने आज इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव पर 42 से अधिक सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।
चर्चा के समापन पर गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी सदस्यों को सदन में बोलने न देने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि बिरला सदन की कार्यवाही सभी के साथ समान भावना से चलाते हैं और उनके नैतिकता पर विपक्ष सवाल नहीं उठा सकता। उनका कहना था कि इतिहास में लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए तीन प्रस्ताव आए हैं, लेकिन प्रस्ताव के निपटारे तक सदन में न आने की उच्च नैतिक मिसाल केवल बिरला ने ही पेश की है। अतीत में स्पीकर प्रस्ताव आने के बावजूद सदन की कार्यवाही चलाते रहे हैं, लेकिन बिरला ने प्रस्ताव दिए जाने के साथ ही नैतिक आधार पर यह घोषणा कर दी थी कि वे इस प्रस्ताव पर चर्चा पूरी होने तक सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे।
बिरला के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव में आरोप लगाया गया था कि वे सदन में विपक्षी नेता और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं देते हैं। उन्होंने विपक्षी महिला सांसदों पर आधारहीन आरोप लगाए। उन्होंने सार्वजनिक हित के मुद्दों उठाने पर विपक्षी सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया और वे पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने से सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को नहीं रोकते हैं। इस प्रकार वे अपने पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण से सदन के सदस्यों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और ऐसे घोषणाएं करते हैं और निर्णय लेते हैं जो अधिकारों को प्रभावित और कमजोर करते हैं। इसमें यह आरोप भी लगाया गया था कि वे सभी विवादास्पद मामलों में सत्तारूढ़ दल के दृष्टिकोण का खुलकर समर्थन करते हैं। ये बातें सदन के संचालन और सदन में जनता की चिंताओं और शिकायतों के अभिव्यक्ति के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करती हैं, इसलिए उन्हें अपने पद से हटाया जाना चाहिए।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने बिरला पर सदन की कार्यवाही में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों के साथ नरमी बरतने और पक्षपातपूर्ण व्यवहार अपनाने का आरोप लगाया, लेकिन शाह ने इन सभी आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा कि बिरला अत्यधिक शालीनता, सभी के साथ समान व्यवहार, सिद्धांतों की रक्षा करते हुए पारदर्शी तरीके से और ईमानदारी से सदन की कार्यवाही चलाते हैं। उनका कहना था कि बिरला की ईमानदारी पर सवाल उठाना निंदनीय है और स्पीकर के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव लाना (सदन के) सम्मान और प्रतिष्ठा के खिलाफ है।
शाह ने विपक्षी नेता राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि वे सदन में नहीं आते हैं और कार्यवाही में भाग नहीं लेते हैं, बल्कि विदेश जाकर देश की निंदा करते हैं। इस बीच विपक्षी दलों के सदस्यों ने शाह पर अपार्लमेंटी भाषा का उपयोग करने का आरोप लगाते हुए सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू किया और अब तक हल्की सी चर्चा के साथ शाह की बात सुनने वाले विपक्षी सदस्य सदन के बीचों-बीच आ गए। वे नारे लगाते हुए शाह से माफी मांगने की मांग करने लगे।
प्रेसीडिंग ऑफिसर जगदम्बिका पाल ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि यदि शाह की बात में कोई अपार्लमेंटी शब्द उपयोग हुआ होगा तो उसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा। उन्होंने सभी सदस्यों से अपनी सीटों पर जाने का अनुरोध किया, लेकिन जब सदस्य नहीं माने तो शाह ने अपनी बात जारी रखते हुए विपक्ष पर फिर से हमला शुरू कर दिया।
शाह की बात समाप्त होने के बाद प्रेसीडिंग ऑफिसर ने डॉक्टर जावेद से प्रस्ताव पर बोलने को कहा, लेकिन विपक्षी सदस्य हंगामा करते रहे। प्रेसीडिंग ऑफिसर ने सदस्यों से अनुरोध किया कि वे अपनी सीटों पर जाकर डॉक्टर जावेद को बोलने दें, मगर हंगामा बढ़ता गया तो जगदम्बिका पाल ने प्रस्ताव सदन में पेश कर दिया, जिसे ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया।

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