
नफ़रत की राजनीति देश को बर्बादी की ओर ले जा रही है, सांप्रदायिकता ने देश की शांति को खतरे में डाल दिया है: मौलाना अरशद मदनी
देश की वर्तमान स्थिति पर गहरा दुःख और चिंता व्यक्त करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि आज देश एक बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है, जहां सांप्रदायिक ताकतें पूरी तरह से संगठित तरीके से मुसलमानों को निशाना बना रही हैं। यह बात उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद कर्नाटक के अधिवेशन से संबोधित करते हुए कही। आज यहां जारी एक बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि नफरत की आग भड़काई जा रही है और समाज को मानवता से वंचित किया जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि राह चलते बेगुनाह मुसलमानों को मार दिया जाता है, दिन-दहाड़े लिंचिंग की जाती है और फिर मظलूम को ही अपराधी बनाकर पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक तत्वों के पास यदि सरकार और शक्ति की ताकत है, लेकिन हमारे पास प्यार, मोहब्बत, मानवता और देश के संविधान की वह ताकत मौजूद है जिसके सहारे हम इन साजिशों को नाकाम कर सकते हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कभी नफरत के रास्ते पर नहीं चला है और न ही कभी चलेगा, बल्कि इसका संदेश हमेशा शांति, भाईचारे और मानवता का रहा है। हम हिंदू या मुसलमान नहीं देखते, हम इंसान देखते हैं और इसी आधार पर सेवा करते हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीयत की ओर से जिस पैमाने पर राहत कार्य किए गए, उसके गवाह वे क्षेत्र और वहां के लोग हैं जिन्होंने खुले दिल से इस सेवा का स्वीकार किया। उन्होंने अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि यह देश की बदकिस्मती है कि जिन लोगों के पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया, जेलों में गए, जान की कुर्बानियां दीं और इस देश को आजाद कराया, आज उनकी संतान को 'देशद्रोही' कहा जा रहा है। इसी कौम के नौजवानों को झूठे आतंकवादी मामलों में फंसाकर उनकी जिंदगी बर्बाद की जा रही है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद देश भर में मظलूमों के मामले लड़ती है, निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उनकी पैरवी करती है और एक लंबी सूची उन बेगुनाहों की है जिन्हें जमीयत की कानूनी लड़ाई के परिणामस्वरूप सम्मानपूर्वक बरी किया गया। हम धर्म के आधार पर नहीं बल्कि मظलूमियत और मानवता के आधार पर मामले लड़ते हैं। सांप्रदायिक ताकतें आरोप लगाती हैं कि हम आतंकवादियों का मामला लड़ते हैं, लेकिन हमारा स्पष्ट रुख है कि हम आतंकवादियों का नहीं बल्कि मظलूमों का मामला लड़ते हैं। देश में बढ़ती सांप्रदायिकता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि आज सांप्रदायिकता की जड़ें बहुत गहरी हो गई हैं, जिसका खमियाजा सिर्फ मुसलमान नहीं बल्कि पूरा देश भुगत रहा है और अन्य अल्पसंख्यक भी गंभीर चोट महसूस कर रहे हैं। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मियां मुसलमानों से संबंधित बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हमें मियां मुसलमान कहलाने में कोई शर्म नहीं है, क्योंकि मियां मुसलमान इस्लाम पर जीता है और इस्लाम पर ही मरता है। ऐसे बयान एक विशेष मानसिकता को दर्शाते हैं जो भाषा और व्यवहार से स्पष्ट रूप से झलकती है। मौलाना मदनी ने असम की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि एनआरसी के मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कानूनी लड़ाई लड़ी, उन्होंने कहा कि असम में मुसलमानों को विदेशी घोषित करके बहुसंख्यक की नजर में संदिग्ध बनाने की लगातार कोशिश की गई, जिसके परिणामस्वरूप सामाजिक स्तर पर सांप्रदायिक तनाव हमेशा बना रहता है। अंतिम एनआरसी के लागू होने के छह साल बाद भी पहचान पत्र जारी न किए जाने के मामले को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया, जिस पर अदालत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए केंद्र, असम सरकार और एनआरसी अधिकारियों को नोटिस जारी किए। जमीयत उलेमा-ए-हिंद न तो कभी पीछे हटी है, न आज हटेगी और न ही आगे कभी हटेगी, क्योंकि यह वह जमात है जिसने आजादी के लिए कुर्बानियां दी हैं और जिसके अकाबिरों ने इस देश के सेक्युलर संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने देश में मुसलमानों की वर्तमान स्थिति पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि आज मुसलमानों को देशद्रोही जैसे अपमानजनक शब्द दिए जा रहे हैं, उनके घरों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं, मदरसे और मस्जिदें ध्वस्त की जा रही हैं। ऐसे हालात में कौन पागल और दीवाना होगा जो यहां आकर बसने का सोचेगा। उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर मुसलमानों को मारा जा रहा है, जबकि गाय सिर्फ काटने के लिए नहीं होती, खुद मेरे पास गायें हैं और हम उन्हें पालते हैं, लेकिन सांप्रदायिक मानसिकता को मुसलमान को मारने के लिए सिर्फ एक बहाना चाहिए। मौलाना मदनी ने कहा कि यह देश हमारा है, हिंदू और मुसलमान सदिय
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