
संसद में हुए घटना पर राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी: विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी के बयान पर बढ़ते विवाद पर कहा है कि सदन में आए घटना पर राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इस मामले का समाधान सदन के अंदर ही निकाला जाएगा।
श्री गुप्ता ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिल्ली विधानसभा में 6 जनवरी को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी जिसके कारण तीन दिन तक सदन की कार्यवाही प्रभावित रही और 7 जनवरी को सदन की कार्यवाही को शब्दशः पढ़कर सुनाया गया। नेता प्रतिपक्ष आतिशी को सदन में आकर स्पष्टीकरण पेश करने का मौका दिया गया लेकिन वे नहीं आए। नेता प्रतिपक्ष के बयान के बाद सदन में जैसा माहौल बना उसके कारण बार-बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि मामले की पुष्टि के बाद नेता प्रतिपक्ष को बार-बार बुलाया गया और अपना रुख रखने को कहा गया लेकिन वे नहीं आए। उन्होंने कहा कि भावनाओं से खाली होने के कारण इस तरह के बयान सामने आते हैं। आम लोगों की सुरक्षा के लिए जिन लोगों ने अपना सब कुछ कुर्बान किया उनका सम्मान किया जाना चाहिए। इसके बावजूद जिस तरह का रवैया अपनाया गया वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की इस कार्रवाई को 'चोरी और सीना जोरी' कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि पंजाब के एफएसएल विभाग को भी नोटिस भेजा जा रहा है और उन्हें रिपोर्ट पेश करने के लिए 22 जनवरी तक का समय दिया गया है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक की ओर से मिले जवाब में व्यक्तिगत कारणों से और समय मांगा गया है, इसलिए उन्हें भी 22 जनवरी तक जवाब देने की मोहलत दी गई है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली विधानसभा की विशेष अधिकार समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है। समिति ने श्रीमती आतिशी को नोटिस जारी कर 19 जनवरी तक अपना रुख पेश करने को कहा है।
उन्होंने कहा, 'तथ्यों को झुठलाया नहीं जा सकता लेकिन सदन की कार्यवाही को चुनौती देना एक गंभीर मामला है। यह सदन और इसके सदस्यों से जुड़ा मामला है मगर बाहर से दबाव बनाया जा रहा है। इसके पीछे कौन लोग हैं उन्हें जवाब देना पड़ेगा। देश के संविधान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है संविधान की ताकत और भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। यह सदन की गरिमा से जुड़ा मामला है। सदन के घटना पर विधानसभा की कार्यवाही में हस्तक्षेप करना एक राजनीतिक इरादा है। हम किसी राजनीतिक मुहिम के आगे झुकने वाले नहीं हैं। इस मामले का फैसला सदन के अंदर ही होगा और जरूरत पड़ी तो सदन की बैठक बुलाई जाएगी।
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