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राष्ट्रीय

प्रशांत क्षेत्र हिंद महासागर। जर्मनी के लिए ध्यान का केंद्र: प्रधानमंत्री मोदी

Awaze Bihar4 मिनट पढ़ें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत-प्रशांत क्षेत्र भारत और जर्मनी दोनों के लिए ध्यान का केंद्र है और इस क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने के लिए एक परामर्श प्रणाली शुरू की जा रही है, साथ ही दोनों देश सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा कि भारत-जर्मनी हमेशा से कंधे से कंधा मिलाकर चले हैं और इस दोस्ती का प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी दिखाई देता है। घाना, कैमरून और मालावी जैसे देशों में संयुक्त परियोजनाओं के माध्यम से हमारी त्रिस्तरीय विकास साझेदारी दुनिया के लिए एक सफल मॉडल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण के देशों के विकास के लिए अपने संयुक्त प्रयासों को जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि भारत-प्रशांत दोनों देशों के लिए ध्यान का केंद्र है। इस क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने के लिए हम एक परामर्श प्रणाली शुरू करने जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन और गाजा सहित कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत सभी मुद्दों और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है और इस दिशा में किए जाने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता है। हम इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी इसके खिलाफ मिलकर पूरी ताकत से लड़ाई जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी इस बात से सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी-4 के माध्यम से दोनों देशों का संयुक्त प्रयास इसी सोच का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग वर्षों से मजबूत हुआ है और आज इसका प्रभाव जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और जर्मनी की प्राथमिकताएं एक जैसी हैं। इसमें सहयोग बढ़ाने के लिए भारत-जर्मनी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का संयुक्त मंच बनेगा। उन्होंने कहा कि हम पर्यावरण, ऊर्जा, शहरी विकास और शहरी परिवहन जैसे क्षेत्रों में मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों की कंपनियों का हरित हाइड्रोजन में नया मेगा परियोजना भविष्य की ऊर्जा के लिए क्रांति साबित होगा। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। आज किए गए समझौतों से सहयोग को नई गति और मजबूती मिलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग परस्पर विश्वास और साझा सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रक्षा व्यवसाय से संबंधित प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए वे चांसलर मर्ज का दिल की गहराई से धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि हम रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पर भी काम करेंगे, जिससे साझा विकास और साझा उत्पादन के नए अवसर पैदा होंगे।

श्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच ऐतिहासिक और गहरे जनसंपर्क हैं और आज हम इस ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक साझेदारी का रूप दे रहे हैं। प्रवास, आवाजाही और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है और भारत के कुशल युवा जर्मनी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक कौशल साझेदारी पर जारी संयुक्त घोषणा इसी विश्वास का प्रतीक है। इससे विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र में पेशेवरों की आवाजाही आसान होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने खेल के क्षेत्र में भी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह युवाओं को जोड़ने का एक प्रभावी साधन बनेगा। आज तैयार की गई उच्च शिक्षा के संबंध में विस्तृत रोडमैप शैक्षिक क्षेत्र में हमारी साझेदारी को नई दिशा देगा। मैं जर्मनी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर स्थापित करने के लिए आमंत्रित करता हूं। भारतीय नागरिकों के लिए वीजा मुक्त ट्रांजिट की घोषणा पर मैं चांसलर मर्ज का धन्यवाद करता हूं। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच निकटता और बढ़ेगी।

उन्होंने गुजरात के लोथल में निर्माणाधीन राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर को जर्मनी के समुद्री संग्रहालय से जोड़ने पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय का जर्मनी के साथ घनिष्ठ सह

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