
वंदे मातरम के 150 वर्ष और भारत की स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका का उत्सव
77वें गणतंत्र दिवस समारोह का केंद्रीय विषय राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ और भारत के इतिहास में इसकी अद्वितीय भूमिका पर आधारित है। यह गीत राष्ट्र के सामूहिक चेतना का प्रतिनिधित्व करता है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए जीवन का नारा बनकर उभरा।
वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली संकल्प का प्रतीक है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अनगिनत देशभक्तों को भारत को गुलामी से मुक्त कराने के लिए प्रेरणा और उत्साह प्रदान किया।
एक अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशव्यापी समारोहों को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य एक ऐसी प्रभावी अभियान को बढ़ावा देना है जो नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं और छात्रों को इस गीत की मूल क्रांतिकारी भावना से जोड़े। इन समारोहों का उद्देश्य इस अमर संदेश को श्रद्धांजलि देना है।
एक ऐसे समय में जब राष्ट्र स्वतंत्रता के लिए उत्सुक था, वंदे मातरम आंदोलन की आवाज बन गया - एक ऐसी आवाज जो केवल गाई नहीं गई, बल्कि जिसे जिया गया, सांसों में बसाया गया और जिसके लिए बलिदान दिए गए।
आज भी वंदे मातरम पूरे देश में औपचारिक और अनौपचारिक समारोहों में गर्व और श्रद्धा के साथ गाया और बजाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि 7 नवंबर 2025 को राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ वर्ष भर के अवसर के रूप में मनाई जाएगी।
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