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राष्ट्रीय

संसद की गरिमा को बनाए रखने के लिए बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया: विपक्ष

Awaze Bihar2 मिनट पढ़ें

लोकसभा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गुरु गोगोई ने सोमवार को कहा कि सदन में सदस्यों के साथ असमान व्यवहार और संसद की गरिमा को बचाने के उद्देश्य से विपक्ष की ओर से स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।
श्री गोगोई ने कहा कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का व्यक्तिगत संबंध सभी के साथ अच्छा है, लेकिन सदन में सभी सदस्यों के साथ समान व्यवहार नहीं होता है। उन्होंने कहा कि स्पीकर का कर्तव्य है कि वे सदन के रक्षक हों, सरकार की आवाज न बनें।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपनी बात रखने नहीं दी गई। उन्हें बार-बार सरकारी सदस्यों ने टोका, यहां तक कि रक्षा, गृह और संसदीय कार्य मंत्रियों ने भी हस्तक्षेप की।
श्री गोगोई ने कहा कि राहुल गांधी महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे, जैसे कि जब चीनी सेना भारतीय सीमा की ओर बढ़ रही थी तो उस समय के सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवाने ने रक्षा मंत्री से कार्रवाई के निर्देश मांगे, लेकिन कई घंटों बाद उन्हें प्रधानमंत्री की ओर से कहा गया कि "जो उचित समझो करो।"
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई कि चर्चा अविश्वास प्रस्ताव के विषय से भटक रही है। गोगोई ने जवाब दिया कि यदि सदन में टोकने की गिनती की जाए तो स्पष्ट होगा कि सबसे अधिक हस्तक्षेप रिजिजू ने की है।
इसी दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि रिजिजू की हस्तक्षेप इस लिए है क्योंकि इतना अयोग्य विपक्ष कभी नहीं रहा। गोगोई ने कहा कि शाह के बयान से उनकी बात का दायरा और व्यापक हो गया है।
कांग्रेस के डिप्टी लीडर ने आगे कहा कि अमेरिका के न्याय विभाग के दस्तावेजों में एक भारतीय उद्योगपति और एक मंत्री का नाम आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ ऐसे व्यापारिक समझौते पर सहमति दी है जिससे देश का व्यापार और कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने पूछा कि ऐसा क्या दबाव है कि प्रधानमंत्री देश के हित के विरुद्ध जाकर यह हानिकारक समझौता कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि "देश जानना चाहता है कि जनरल नरवाने ने अपनी पुस्तक में जो बातें कही हैं, क्या वे खोखली हैं या जनरल नरवाने झूठ बोल रहे हैं? ये बातें जनता के सामने आनी चाहिए।"
इसके पहले कांग्रेस के मोहम्मद जावेद ने बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसे 50 से अधिक सदस्यों ने खड़े होकर समर्थन दिया।
इस पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बिरला के खिलाफ प्रस्ताव आने के बाद उनके नियुक्त पैनल के सदस्य अध्यक्षता नहीं कर सकते। चूंकि इस समय लोकसभा का कोई डिप्टी स्पीकर नहीं है, इसलिए सदन की राय के बाद कोई सदस्य चर्चा के दौरान अध्यक्षता कर सकता है। कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल और तृणमूल कांग्रेस के सुगत रॉय ने भी यही राय व्यक्त की, लेकिन अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया।

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