पाकिस्तान की अदालत ने कुछ मामलों में इमरान खान और बुशरा की अंतरिम जमानत में विस्तार कर दिया।
Awaz E Bihar••0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
इस्लामाबाद में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को आज अदालत से कुछ राहत मिली। इस्लामाबाद की एक स्थानीय अदालत ने इमरान और बुशरा बीबी को 9 मई और अन्य 5 मामलों में अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ा दी। अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री को आगामी सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से या वीडियो लिंक के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया। खान काफी समय से रावलपिंडी जेल (अडियाला जेल) में बंद हैं। वह कई मामलों में दोषी ठहराए गए हैं।
अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अफजल मुजोका ने अग्रिम जमानत की याचिकाओं पर सुनवाई की। इमरान और बुशरा बीबी की ओर से अधिवक्ता शम्सा कियानी पेश हुईं। हालांकि, इमरान की अनुपस्थिति के कारण जमानत याचिकाओं पर तर्क आगे नहीं बढ़ सके। अदालत ने अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाते हुए सुनवाई 27 जनवरी तक स्थगित कर दी।
पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ 9 मई के मामलों के अलावा हत्या के प्रयास और कथित तौर पर जाली रसीदें जमा करने सहित अन्य मामले भी दर्ज हैं। बुशरा बीबी को तोशखाना के उपहार से संबंधित कथित तौर पर जालसाजी के आरोप में एक अलग मामले का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, अदालत ने बुशरा बीबी की अंतरिम जमानत याचिका को अग्रिम जमानत में विस्तारित करते हुए मामले की सुनवाई 27 जनवरी तक स्थगित कर दी।
इस बीच, पीटीआई के वकील खालिद यूसुफ चौधरी को तोशखाना मामले में उनकी हालिया सजा के खिलाफ अपील दायर करने के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी पेपर्स पर उनके हस्ताक्षर प्राप्त करने के लिए इमरान खान से मिलने की अनुमति फिर से नहीं दी गई। पीटीआई ने तोशखाना 2 मामले में पार्टी संस्थापक की अपील के पक्ष में "जानबूझकर रुकावट" की निंदा की। पीटीआई ने कहा कि पंजाब जेल नियम 1978 के नियम 178 और 179 के तहत हर कैदी को अपने वकील से मिलने, कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने और अपील दायर करने का कानूनी अधिकार है और जेल प्रशासन को इस संबंध में रुकावटें खड़ी करने का कोई अधिकार नहीं है। पार्टी ने आगे आरोप लगाया कि अपील के अधिकार से इनकार संविधान के अनुच्छेद 10-ए, 4, 9 और 25 का उल्लंघन करता है।