एफसीआरए बिल का वर्तमान स्वरूप स्वीकार्य नहीं: कांग्रेस
Awaz E Bihar••35 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
कांग्रेस ने विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक के वर्तमान स्वरूप का विरोध किया है और कहा है कि पार्टी और पूरा विपक्ष इसे वर्तमान स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगा और सभी मिलकर इसका विरोध करेंगे। कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष एफसीआरए विधेयक को वर्तमान स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि आरएसएस से जुड़े संगठनों के लिए अलग नियम और अन्य गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के लिए अलग कानून रखने की सोच स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना था कि पार्टी इस 'जबरन' विधेयक को पास नहीं होने देगी। श्री वेणुगोपाल ने कहा, "लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एफसीआरए विधेयक के संबंध में अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। पार्टी और पूरे विपक्ष का रुख स्पष्ट है कि एफसीआरए विधेयक को इसके वर्तमान स्वरूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आरएसएस सब कुछ कर सकता है, जबकि अन्य गैर-सरकारी संगठनों के लिए अलग कानून हों, ऐसी सोच स्वीकार्य नहीं है। हम इस जबरन विधेयक का विरोध करेंगे और इसे किसी भी कीमत पर पास नहीं होने देंगे।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले से ही राम मंदिर चंदा विवाद पर चर्चा की मांग कर रही है क्योंकि पूरा देश इस मुद्दे को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों पर कथित अत्याचार और फायरिंग के मुद्दे पर सदन में आकर बयान देना चाहिए। संसद चर्चा और बहस की जगह है, लेकिन सरकार बहस से बचते हुए विधेयकों को जल्दबाजी में पास कराना चाहती है। इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि सरकार जनता और विपक्ष की आवाज नहीं सुन रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों पर कथित हमले, ई-20 मुद्दे, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने और राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे जनहित के मुद्दों को संसद में उठा रहा है, लेकिन सरकार चर्चा कराने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर अपना बयान दें। उन्होंने कहा कि चर्चा से ही समाधान निकलेगा और सदन में मौजूद नहीं होकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद का अपमान कर रहे हैं।