शक्ति के प्रयोग से समस्याएं हल नहीं होती: शी जिनपिंग
Awaz E Bihar••0 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
चीन ने शनिवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हुई शिखर बैठक को ऐतिहासिक मुलाकात बताते हुए कहा कि यह दुनिया की दो बड़ी शक्तियों के संबंधों को नई दिशा दे सकती है। चीन के अनुसार दोनों नेताओं ने "रणनीतिक स्थिरता पर आधारित निर्माणकारी चीन-अमेरिका संबंध" स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच चीन-अमेरिका संबंधों और वैश्विक शांति और विकास से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर, गहराई और निर्माणकारी तरीके से लंबी चर्चा हुई।
वांग यी ने कहा कि यह शिखर बैठक द्विपक्षीय संबंधों के लिए नए आरंभ की स्थिति रखती है और इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देश एक दूसरे के साथ तालमेल का सही रास्ता खोजने का प्रयास कर रहे हैं। यह पिछले साल अक्टूबर में बुसान सम्मेलन के बाद शी जिनपिंग और ट्रम्प के बीच पहली बार आमने-सामने की मुलाकात थी, जबकि पिछले नौ वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का यह पहला चीन दौरा भी था। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक दूसरे की सफलता में मददगार साबित हो सकते हैं और वैश्विक समृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं।
वांग यी के अनुसार शी जिनपिंग ने वैश्विक प्रणाली के भविष्य और बढ़ती भौगोलिक राजनीतिक तनाव के संदर्भ में चीन-अमेरिका संबंधों के मूलभूत प्रश्नों को सम्मेलन का केंद्र बिंदु बनाया। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग ने सवाल उठाया कि क्या चीन और अमेरिका थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से निकलकर बड़ी शक्तियों के संबंधों का नया मॉडल स्थापित कर सकते हैं और क्या दोनों देश वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपट सकते हैं।
वांग यी ने कहा कि सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि आगामी तीन वर्षों और उसके बाद के लिए रणनीतिक स्थिरता पर आधारित निर्माणकारी संबंधों के ढांचे पर सहमति बनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो चीन और न ही अमेरिका एक दूसरे को अलग कर सकते हैं या एक दूसरे के बिना विकास कर सकते हैं। उनके अनुसार सहयोग से दोनों को लाभ और संघर्ष से दोनों को नुकसान होगा।
उन्होंने जोर दिया कि दोनों शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा को शून्य योग खेल नहीं बनने देना चाहिए। सम्मेलन के दौरान कूटनीति, सैन्य संपर्क, व्यापार, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यटन और जन स्तर के आदान-प्रदान को बढ़ाने पर भी सहमति बनी। ताइवान का मुद्दा भी वार्ता में प्रमुख रहा। वांग यी ने कहा कि यह चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ताइवान की स्वतंत्रता और ताइवान में शांति आग और पानी की तरह हैं, जो एक साथ नहीं रह सकते। उन्होंने अमेरिका पर जोर दिया कि वह एक चीन सिद्धांत और तीन संयुक्त घोषणाओं पर सख्ती से अमल करे।
सम्मेलन में पश्चिमी एशिया, ईरान और यूक्रेन युद्ध सहित वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। शी जिनपिंग ने कहा कि शक्ति के उपयोग से समस्याएं हल नहीं होती हैं और वार्ता ही एकमात्र सही रास्ता है। चीन ने अमेरिका-ईरान वार्ता जारी रखने और होरमुज़ जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द फिर से खोलने का समर्थन किया। यूक्रेन संघर्ष पर दोनों देशों ने युद्ध समाप्त करने और शांति वार्ता को बढ़ावा देने में निर्माणकारी भूमिका निभाने का संकल्प व्यक्त किया।
आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर दोनों देशों ने "व्यापार बोर्ड" और "निवेश बोर्ड" स्थापित करने, कृषि उत्पादों की बाजार पहुंच से संबंधित मुद्दों का समाधान करने और परस्पर टैरिफ में कमी के माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। सम्मेलन के दौरान अमेरिकी प्रौद्योगिकी और विनिर्माण कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया, जिनसे शी जिनपिंग ने मुलाकात करते हुए भरोसा दिलाया कि चीन अपने दरवाजे और व्यापक रूप से खोलेगा।
वांग यी ने पुष्टि की कि शी जिनपिंग ने इस साल के अंत में अमेरिका के आधिकारिक दौरे के लिए ट्रम्प के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है।