हल्द्वानी’ शुद्धिकरण विवाद में तीव्रता : खुरगे ने भाजपा पर जातिगत खाई को गहरा करने का आरोप लगाया
Awaz E Bihar••27 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की एक जनसभा के बाद हल्द्वानी के राम लीला मैदान में की गई 'शुद्धिकरण' की रस्म पर गुरुवार को राजनीतिक विवाद और तेज हो गया। कांग्रेस ने भाजपा पर जातिगत पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, जबकि सत्तारूढ़ पार्टी ने इस घटना से खुद को अलग कर लिया है।
श्री खरगे ने इस रस्म की कड़ी निंदा करते हुए सवाल उठाया कि उनकी जनसभा के बाद सार्वजनिक स्थान पर 'हवन' कराने की क्या जरूरत थी? उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना ने भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता को बेनकाब कर दिया है। श्री खरगे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हम शुरू से ही कहते आ रहे हैं कि इस देश में दलितों के लिए कोई जगह नहीं है। आखिर वहां 'हवन' कराने की क्या जरूरत थी?"
उन्होंने कहा कि राम लीला मैदान एक सार्वजनिक स्थान है जहां सभी राजनीतिक दल नियमित रूप से बैठकें करते हैं, और उनकी जनसभा के बाद शुद्धिकरण की रस्म करना लोकतांत्रिक मूल्यों और हिंदू धर्म की भावना दोनों के खिलाफ है। श्री खरगे ने कहा, "हर पार्टी के लोग राम लीला मैदान में जनसभा करते हैं, लेकिन जो कुछ किया गया वह हिंदू धर्म के खिलाफ है। भाजपा के लोग देश को बांटने और जातियों के बीच संघर्ष पैदा करने का काम कर रहे हैं। भाजपा के बयान और कार्य में यही अंतर है, मैं इसकी निंदा करता हूं।"
यह घटना 8 अगस्त को हल्द्वानी के राम लीला मैदान में श्री खरगे द्वारा 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों की तैयारियों के सिलसिले में आयोजित एक जनसभा के बाद हुई। रिपोर्टों के अनुसार, श्री राम सेना के सदस्यों ने इस स्थान का शुद्धिकरण किया और उस मंच के पास हवन किया गया जिसका उपयोग श्री खरगे के कार्यक्रम के लिए किया गया था, जिस पर कांग्रेस की ओर से तीव्र प्रतिक्रिया हुई।
कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की है। श्री वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है जो भाजपा का दलित विरोधी चरित्र दिखाती है, जिसके लिए पीएम मोदी को माफी मांगनी चाहिए।" उन्होंने श्री खरगे के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वे एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने अनगिनत सामाजिक बाधाओं को तोड़कर भारतीय राजनीति में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है, और भाजपा का यह कार्य डॉ अम्बेडकर और हमारे संविधान की भावना के खिलाफ है।
दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि पार्टी ने इस रस्म का समर्थन या आयोजन किया था। राज्यसभा में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और नेता सदन जेपी नड्डा ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि पार्टी ऐसे कदमों का समर्थन नहीं करती है। श्री नड्डा ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा, "खरगे जी ने जो कहा वह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है - न केवल कांग्रेस पार्टी के लिए बल्कि हम सभी के लिए। इस मामले की जांच की जाएगी।"
संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन श्री खरगे और श्री नड्डा के बीच हुए इस वाक्य विनिमय ने माहौल को गरमा दिया, जिसके बाद राज्यसभा के सभापति को भी दखल देना पड़ा और उन्होंने जोर देकर कहा कि छुआछूत की निंदा हर किसी को करनी चाहिए। 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के करीब आते ही हल्द्वानी का यह विवाद राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हो गया है, और दोनों दल इस पर अपने-अपने रुख का इज़हार कर रहे हैं।