आह्ले देश की हस्तशिल्प को प्रोत्साहित कर 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा दें : मोदी
Awaz E Bihar••22 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हस्तशिल्प दिवस को देश की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की象征 बताते हुए देशवासियों से हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को बढ़ावा देने की अपील की है। श्री मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि ७ अगस्त को देश हस्तशिल्प दिवस मना रहा है। इस दिन हम कारीगरों की कुशलता और उनकी रचनात्मक क्षमताओं का जश्न मनाते हैं क्योंकि वे पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि "हस्तशिल्प से बना हर परिधान किसी न किसी क्षेत्र, समुदाय और उससे जुड़े अनगिनत लोगों की कहानी को सामने लाता है। वे लोग हैं जो गर्व से भारत की सांस्कृतिक विरासत को संभालने में लगे हुए हैं। आज के दिन मेरी अपील है कि हम हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करके, अपने कारीगर साथियों का सम्मान करें। आइए, हम 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को और मजबूत बनाएं।" उन्होंने देश में हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे बड़ी संख्या में लोगों की जिंदगी बेहतर हो रही है। पochampalli से पटना और कत्थम पल्ली से कच्छ तक इसकी कई मिसालें देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि "आज ऐसे कई लोग और समूह हैं जो हस्तशिल्प की हमारी शानदार परंपरा को नई ऊर्जा और पहचान दे रहे हैं। कोई 'पोचमपल्ली इकत' की सुंदर परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, तो कोई महिला कारीगरों को जोड़कर ऊनी उत्पाद बना रहा है। कुछ लोग केरल की पारंपरिक 'कसावु कला' को संरक्षित कर रहे हैं। इससे हमारी माताओं और बहनों को रोजगार भी मिल रहा है।" खादी की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 'खादी' काफी लोकप्रिय हुई है। पिछले १२ वर्षों में इसकी बिक्री छह गुना बढ़ी है। बिक्री के ये आंकड़े अब ८००० करोड़ रुपये के करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि "मेरी आप सभी से अपील है कि आने वाले त्योहार में 'खादी' की कोई न कोई, हस्तशिल्प की कोई न कोई, कारीगरी की कोई न कोई उत्पाद जरूर खरीदें।" उन्होंने कश्मीर की पारंपरिक और अनोखी चटाई 'वूग' के संबंध में की जा रही कोशिशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल इस चटाई की बड़ी विशेषता यह है कि इससे गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्मी मिलती है। उन्होंने कहा कि श्रीनगर के गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तंजीला 'वूग' की परंपरा को एक नई जिंदगी देने में लगे हुए हैं। अब उनकी इस कोशिश से कई लोग जुड़ते जा रहे हैं और अब यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और 'वूग' देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच रहा है। श्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखी वाला गांव में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की 'वेदोर प्रेरणा सौहार्द लेमन टी' का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसमें लेमन ग्रास, गुलोय, मुलेठी, तुलसी, कच्ची हल्दी, दालचीनी, इलायची और सौंफ जैसी प्राकृतिक चीजें शामिल हैं और अपने अनोखे स्वाद और गुणों के कारण इस चाय ने बहुत कम समय में लोगों के बीच विशेष पहचान बना ली है। उन्होंने कहा कि यह ब्रांड अब देश के बड़े संस्थानों तक पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री ने त्रिपुरा की जनजातीय समुदाय में लोकप्रिय पारंपरिक वाद्य 'चुंग प्रेंग' का भी उल्लेख किया और कहा कि सूरज कुमार देव वर्मा के प्रयासों से यह पारंपरिक वाद्य वहां के युवाओं में लोकप्रिय हो रहा है। यह युवा अब चुंग प्रेंग के साथ ही वहां के अन्य पारंपरिक वाद्यों पर भी अपना कला प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत वर्षा के पानी को संचय करने, भूजल रीचार्जिंग, पुराने तालाबों के पुनरुद्धार और वृक्षारोपण को नई गति दी जा रही है। उन्होंने अभियान में लोगों की बढ़ती भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि कहीं पुराने तालाबों से मिट्टी निकाली जा रही है, तो कहीं कुओं और बावड़ियों का पुनरुद्धार किया जा रहा है। जो बोरवेल अब उपयोग में नहीं हैं, उन्हें भूजल रीचार्जिंग के माध्यम से उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश के सीधी जिले, महाराष्ट्र के नासिक, आंध्र प्रदेश के नंद्याल, छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में तालाबों को पुनर्जीवित करने की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि "आइए, हम भी अपने आसपास किसी एक तालाब, कुएं या बावड़ी की जिम्मेदारी लें - पानी की हर बूंद बचाएं। आज बचाई गई हर बूंद, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सबसे बड़ा निवेश है।" प्रधानमंत्री ने बिहार के सीतामढ़ी में पर्यावरण संरक्षण की दिशा म